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    आज समाप्त हो रही कांवड़ यात्रा और क्यों है यह भगवान शिव के लिए इतनी खास?

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 08:45 AM (IST)

    कांवड़ यात्रा (Sawan Shivratri Kanwar Yatra 2026) 30 जुलाई 2026 को शुरू हुई थी और इसका समापन आज यानी 11 अगस्त 2026 को श्रावण शिवरात्रि पर होगा। यह यात ...और पढ़ें

    कांवड़ यात्रा कब समाप्त होगी?

    कांवड़ यात्रा कब समाप्त होगी?

    HighLights

    1. कांवड़ यात्रा 30 जुलाई 2026 को हुई थी शुरू।

    2. समापन 11 अगस्त 2026 को श्रावण शिवरात्रि पर होगा।

    3. भगवान शिव को जल चढ़ाकर मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्रावण मास का महीना महादेव और उनके भक्तों के लिए अधिक महत्वपूर्ण खास माना जाता है। इस शुभ अवसर पर शिव भक्त कांवड़ यात्रा का आयोजन करते हैं। कांवड़ लेने जाने वाले लोग पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल मार्ग अपने गंतव्य के लिए रवाना होते हैं और शिवलिंग पर जल से अभिषेक करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, श्रावण मास में पवित्र नदियों से कांवड़ के जरिए लाया गया जल शिवलिंग पर अभिषेक (Jalabhishek) करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन के शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है, लेकिन अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि, आखिर यह कांवड़ यात्रा कब समाप्त होगी?

    कांवड़ यात्रा कब समाप्त होगी? 

    इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हुई थी और इसी दिन से ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई थी। वहीं इस पवित्र कांवड़ यात्रा का समापन आज यानी सावन शिवरात्रि (Sawan Shivratri 2026) के दिन होगा। इस बार यह शुभ तारीख 11 अगस्त 2026, मंगलवार के दिन है।

    10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार होने के चलते कई स्थानों पर 11 अगस्त को कांवड़ यात्रा का समापन हो गया है। हालांकि भारत के कुछ हिस्सों में श्रावण भर कांवड़ यात्रा चलती है। इस दौरान कांवड़िएं कंधे पर कांवड़ उठाए हर हर महादेव के जयकारे लगाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं।

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    कांवड़ यात्रा क्यों हैं विशेष?

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है, जिसका संबंध भगवान शिव से है। कांवड़ ले जाने वाले श्रद्धालु पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर पैदल मार्ग के जरिए अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं और महादेव का जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि, जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होने के साथ भक्तों पर अपनी खास कृपा बरसते हैं।

    श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि के दौरान शिव मंदिरों में भक्तों की भारी संख्या देखने को मिलती है। कांवड़िए जल लेकर मंदिरों की ओर बढ़ते हैं। ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और खास पूजा अर्चना का आलम शुरू हो जाता है। कई जगहों पर मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। सावन मास की कांवड़ यात्रा भक्त और भगवान के बीच आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

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