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महादेव को पाने के लिए माता पार्वती का कठिन तप: पढ़ें सावन सोमवार व्रत की पूरी महिमा

Published: Fri, 31 Jul 2026 06:15 PM (IST)

सनातन धर्म में श्रावण मास के सोमवार व्रत का विशेष महत्व है, जिसे माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले रखा था।

श्रावण मास में सोमवार व्रत की शुरुआत किसने की थी? (Picture Credits- AI Image)

श्रावण मास में सोमवार व्रत की शुरुआत किसने की थी? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में श्रावण मास में आने वाले सोमवार व्रत का अत्यंत महत्व होता है। मान्यता है कि, इस दौरान व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों में सोमवार व्रत की काफी महिमा बताई गई है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन में व्रत करने से काल सर्प दोष, ग्रह दोष और चंद्र व राहु जैसे गंभीर दोषों का असर कम होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि, इस व्रत की सबसे पहले शुरुआत किसने की थी?

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, शिव पुराण में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव की पूजा और व्रत का सुंदर वर्णन मिलता है। माता पार्वती ने महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तप किया था। कहा जाता है कि, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन महीने में निर्जला और निराहार रहकर शिवजी की आराधना की। उन्होंने ही 'सोलह सोमवार' और 'सावन सोमवार' के व्रतों की नींव रखी।

वरदान की प्राप्ति

माता पार्वती के इसी तप और समर्पण से प्रसन्न होकर सावन के महीने में ही शिवजी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। यही कारण है कि सावन का व्रत अखंड सौभाग्य और मनचाहा जीवनसाथी देने वाला माना गया है। जो भक्त सावन में निष्ठापूर्वक पूजन करते हैं, उन पर महादेव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है।

सावन व्रत का आध्यात्मिक महत्व

सावन व्ऱत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती द्वारा की गई थी,जिस वजह से इस व्रत का प्रभाव काफी शक्तिशाली और पुण्य फलदायी माना जाता है। इस व्रत को खासतौर पर कन्याओं द्वारा योग्य वर प्राप्ति के लिए किया जाता है। कई लोककथाओं में यह पढ़ने को मिलता है कि, एक गरीब ब्राह्माण की लड़की ने सावन के महीने में सोमवार व्रत का पालन किया और उसे आशीर्वाद के रूप में योग्य वर की प्राप्ति हुई है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के उद्देश्य से सोमवार व्रत का पालन करती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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