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    आप भी शादी के फेरों को सिर्फ एक रस्म समझते हैं? 99% लोग नहीं जानते इनका असली मतलब

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 11:16 AM (GMT+05:30)

    क्या आप जानते हैं कि शादी के 7 फेरे सिर्फ अग्नि के चक्कर नहीं, बल्कि सुखी वैवाहिक जीवन की नींव हैं? जानिए इन 7 वचनों का गहरा अर्थ। ...और पढ़ें

    shadi ke saat phere seven vachan meaning and vows

    shadi ke saat phere seven vachan meaning and vows

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। आजकल की शादियां किसी बड़े इवेंट से कम नहीं होतीं। चारों तरफ रोशनी, महंगा डेकोरेशन, लजीज खाना और नाच-गाना। लेकिन, इस शोर-शराबे के बीच, मंडप के नीचे जल रही उस पवित्र अग्नि और उसके चारों ओर लिए जाने वाले सात फेरों का असली अर्थ कहीं खो सा गया है।

    अक्सर शादी में आए मेहमान बस फेरे गिनते हैं- "एक हुआ, दो हुए... बस अब सात होने वाले हैं।" लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि इन सात चक्करों के पीछे छिपे वो सात वादे क्या हैं, जो एक लड़का और लड़की एक-दूसरे से करते हैं?

    यह रस्म नहीं, जीवन का संविधान है

    विवाह के ये सात फेरे (Saptapadi) कोई साधारण रस्म नहीं हैं। प्राचीन भारतीय शास्त्रों के अनुसार, ये सात फेरे वो सात स्तंभ हैं, जिन पर एक सफल गृहस्थ जीवन की नींव टिकी होती है। हर फेरा एक प्रतिज्ञा है, एक ऐसा संकल्प जो दो अनजान लोगों को एक अटूट साझेदारी में बदल देता है।

    7 phere

    (Image Source: AI-Generated)

    सात फेरों के सात गहरे अर्थ

    भरण-पोषण का संकल्प: पहले फेरे में दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे के परिवार की जिम्मेदारी उठाने और अन्न-धन की वृद्धि का वादा करते हैं।

    शक्ति और मर्यादा: दूसरे फेरे में मानसिक और शारीरिक शक्ति के साथ मर्यादा में रहकर जीवन जीने का संकल्प लिया जाता है।

    धन और वफादारी: तीसरे फेरे में ईमानदारी से धन कमाने और एक-दूसरे के प्रति वफादार रहने की शपथ ली जाती है।

    सुख-दुख की साझेदारी: चौथा फेरा यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत आए या कितनी भी बड़ी खुशी, दोनों उसे बराबर बांटेंगे।

    संस्कार और सम्मान: पांचवें फेरे में बच्चों के अच्छे पालन-पोषण और समाज व परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का वादा होता है।

    स्वास्थ्य और साथ: छठे फेरे में उम्र के हर पड़ाव पर एक-दूसरे की सेहत का ख्याल रखने और साथ निभाने की बात कही जाती है।

    शाश्वत मित्रता: सातवां और अंतिम फेरा सबसे महत्वपूर्ण है। यह 'सखा' यानी मित्रता का वचन है। यह वादा करता है कि चाहे जो भी परिस्थिति आए, वे आज किए गए हर वादे को ताउम्र निभाएंगे।

    विवाह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का एक साझा सफर है, जिसे इन सात वचनों की डोर बांधे रखती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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