कब है साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या? नोट करें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या कब मनाई जाएगी? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं। ...और पढ़ें

Shanishchari Amavasya 2026 Date: शनिश्चरी अमावस्या शुभ मुहूर्त। (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'शनिश्चरी अमावस्या' कहा जाता है। यह संयोग न केवल शनि देव की कृपा पाने के लिए विशेष है, बल्कि पितृ दोष की शांति और राहु-केतु के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए भी महामुहूर्त माना जाता है। साल 2026 की पहली शनिश्चरी अमावस्या वैशाख मास में पड़ रही है, जो दान और पुण्य की दृष्टि से बहुत फलदायी है। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

कब है शनिश्चरी अमावस्या 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी। ऐसा कहा जाता है कि ऐसा दुर्लभ संयोग बहुत कम बनता है।
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
- अगर हो पाए, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और पितरों के निमित्त तर्पण करें।
- तांबे के पात्र में जल, काला तिल और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
- भगवान विष्णु की भी विधिवत पूजा करें।
- अंत में आरती करें।
पितृ दोष से मुक्ति के अचूक उपाय
- पीपल के वृक्ष की पूजा: सुबह जल्दी स्नान कर पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में पितरों और देवताओं का वास माना जाता है।
- शनि देव का अभिषेक: शनि मंदिर जाकर भगवान शनि को सरसों का तेल, काले तिल और नीले फूल चढ़ाएं। इस दौरान "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जप करें।
- पितृ तर्पण: जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को अर्घ्य दें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
- खास दान: इस दिन क्षमता के अनुसार, जूते-चप्पल, काले कपड़े, उड़द की दाल और लोहे के बर्तन का दान करना शनि दोष को कम करता है।
पूजा के दौरान क्या न करें?
इस पावन दिन पर तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें। किसी असहाय या बुजुर्ग व्यक्ति का अपमान न करें, क्योंकि शनि देव कर्मों के आधार पर फल देते हैं और अपमान करने से उनका प्रकोप बढ़ सकता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।