क्यों माना जाता है सुबह धरती माता को पहला स्पर्श शुभ, क्या सच में दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा?
सुबह बिस्तर से उठते ही धरती माता को प्रणाम क्यों करना चाहिए? जानिए इसके पीछे का सनातन ज्ञान, क्षमा मंत्र, वैज्ञानिक कारण।

धरती को क्यों करते हैं प्रणाम? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर सुना होगा कि सुबह बिस्तर से उठकर जमीन पर पैर रखने से पहले, धरती माता को छूकर माथे से लगाना चाहिए। हमारी सनातन संस्कृति की यह एक परंपरा बेहद खूबसूरत है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हम ऐसा क्यों करते हैं, इसके फायदे क्या हैं?
दरअसल, शास्त्रों में पृथ्वी को आदरपूर्वक 'मां' का दर्जा दिया गया है। हमारा यह शरीर भी जिन पंचतत्वों से बना है, उनमें से एक प्रमुख तत्व 'भूमि' है। धरती सही मायनों में हमारी पालनहार है। इसलिए, सुबह उठकर उन्हें प्रणाम करना उनके इस निस्वार्थ प्रेम के प्रति अपना धन्यवाद (कृतज्ञता) जताने का एक प्यारा सा तरीका है।
क्षमा मांगने का विधान और मंत्र
चूंकि, धरती को मां के समान पूजनीय माना गया है, इसलिए उन पर पैर रखना एक तरह का दोष माना जाता है। लेकिन, जीवन जीने और चलने-फिरने के लिए उन पर पैर रखना हमारी मजबूरी है। इसी मजबूरी को समझते हुए विष्णु पुराण में एक श्लोक का वर्णन है जिसमें धरती पर पैर रखने से पहले क्षमा मांगने का विधान बताया गया है:
समुद्र-वसने देवि, पर्वत-स्तन-मंडिते।
विष्णु-पत्नि नमस्तुभ्यं, पाद-स्पर्शं क्षमस्व मे॥
इसका अर्थ है: समुद्र की तरह कपड़े धारण करने वाली, पर्वतों से सुशोभित, भगवान विष्णु की पत्नी हे धरती माता! मुझे अपने पैरों से आपको स्पर्श करने के लिए कृपया क्षमा करें।
हर शुभ काम में होती है भूमि वंदना
आपने ध्यान दिया होगा कि यह सम्मान सिर्फ सुबह तक सीमित नहीं है। कोई भी कलाकार मंच पर कला दिखाने से पहले उसे छूकर माथे से लगाता है। हम मंदिर की सीढ़ियों को भी ऐसे ही प्रणाम करते हैं। नया मकान बनाते समय सबसे पहले 'भूमि पूजन' होता है और नींव में चांदी का सांप रखा जाता है (मान्यता है कि पृथ्वी शेषनाग पर टिकी है)। किसान बीज बोने से पहले खेत पूजते हैं, और घर में नई बहू के आने पर दहलीज पुजवाई जाती है। पुराने समय में महिलाएं सुबह उठते ही घर के बाहर पानी छिड़क कर चौक पूरती थीं। यह सब धरती मां की मानसिक पूजा में ही शामिल है।
इसके पीछे का वैज्ञानिक और व्यावहारिक तर्क
अध्यात्म के साथ-साथ इसका एक वैज्ञानिक पहलू भी माना जाता है। रातभर चादर या कंबल ओढ़कर सोने से हमारे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। ऐसे में सुबह सीधे ठंडे फर्श पर पैर रख देने से शरीर में एकदम से सर्दी-गर्मी का प्रवाह हो सकता है, जो सेहत बिगाड़ सकता है। झुककर हाथ से धरती को छूने से शरीर का तापमान धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है।
वहीं, व्यावहारिक नजरिए से देखें तो भूमि वंदना इंसान को 'जमीन से जुड़े रहने' का संदेश देती है। यह हमें सिखाती है कि हम जिंदगी में कितने भी सफल क्यों न हो जाएं, हमारे अंदर धरती की तरह ही सहनशीलता, धैर्य और क्षमा का भाव हमेशा ही होना चाहिए।
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