विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मंदिर से लेकर गृह प्रवेश तक हर शुभ काम में नारियल फोड़ने की परंपरा क्यों? बेहद खास है वजह

Updated: Tue, 18 Aug 2026 06:00 PM (GMT+05:30)

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले नारियल फोड़ने की परंपरा क्यों है? जानिए इसे श्रीफल कहने की वजह, तीन आंखों का रहस्य।

नारियल का महत्व (AI-Generated Image)

नारियल का महत्व (AI-Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी नए या शुभ काम की शुरुआत बिना नारियल के अधूरी मानी जाती है। पूजा-अनुष्ठान हो, गृह प्रवेश का मौका हो, नए वाहन की पूजा हो या शादी-विवाह का आयोजन हर मांगलिक कार्य में नारियल का इस्तेमाल बेहद जरूरी माना गया है। इसे शास्त्रों में 'श्रीफल' कहा गया है, जिसका अर्थ है देवताओं का सबसे प्रिय और पवित्र फल। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हर शुभ अवसर पर नारियल फोड़ने की यह परंपरा क्यों चली आ रही है और इसके पीछे क्या कारण हैं?

हिंदू धर्म के 'कर्मकांड' और 'पूजा-विधि' में वर्णित यह श्लोक बहुत ही महत्वपूर्ण है-

नालिकेरफलं दिव्यं सुस्वादु रसं मनोहरम्।

मया निवेदितं भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥

इसका अर्थ है: हे परमेश्वर! यह नारियल का फल अत्यंत दिव्य, स्वादिष्ट जल-रस से परिपूर्ण और मन को प्रिय लगने वाला है। मेरी इस भक्तिपूर्ण भेंट को कृपा करके स्वीकार करें।

शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नारियल अर्पण करने और इसे फोड़ने के पीछे गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक कारण छिपे हैं:

अहंकार के त्याग का प्रतीक

शास्त्रों के अनुसार, नारियल की बनावट मानव शरीर और स्वभाव का संदेश देती है। नारियल की बाहरी सतह बेहद सख्त और कठोर होती है, जिसे इंसान के 'अहंकार' और कठोर स्वभाव का प्रतीक माना जाता है। वहीं, इसके अंदर का सफेद और कोमल भाग 'शांति' व 'पवित्रता' को दर्शाता है। जब हम भगवान के सामने नारियल फोड़ते हैं, तो इसका सीधा सा अर्थ होता है कि हम अपने घमंड, अहंकार और नकारात्मक विचारों को ईश्वर के चरणों में त्याग रहे हैं और निर्मल मन से उनकी शरण में जा रहे हैं।

भगवान शिव की तीन आंखों का स्वरूप

नारियल के ऊपरी हिस्से पर तीन काले निशान या बिंदु दिखाई देते हैं। धार्मिक नजरिए से देखें तो इन तीन निशानों को भगवान शिव की तीन आंखें (त्रिनेत्र) माना गया है। साथ ही, इन्हें त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास भी माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी शुभ काम से पहले इसे चढ़ाने से जीवन में यश, वैभव और समृद्धि का आगमन होता है।

विघ्नहर्ता गणेश और देवी लक्ष्मी की कृपा

नारियल भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में श्रीगणेश को नारियल अर्पित करने या फोड़ने से उस काम में आने वाली तमाम बाधाएं अपने आप दूर हो जाती हैं। इसके अलावा, दुर्लभ 'एकाक्षी नारियल' (जिसमें केवल एक आंख होती है) को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

 यह भी पढ़ें- भूलकर भी न करें इन 3 चीजों का अपमान, रूठ जाएंगी माता लक्ष्मी और चली जाएगी सुख-समृद्धि

यह भी पढ़ें- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी कब होते हैं गरुड़ पर सवार? यहां पढ़ें इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।