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    सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि का अद्भुत महासंयोग, पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये काम

    Updated: Mon, 15 Jun 2026 08:25 AM (IST)

    आज 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है, जिस पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। पितरों की शांति और आशीर्वाद के लिए इस दिन तर्पण, दान औ ...और पढ़ें

    सोमवती अमावस्या पर कैसे करें पितरों को प्रसन्न? (AI-Generated Image)

    सोमवती अमावस्या पर कैसे करें पितरों को प्रसन्न? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. सोमवती अमावस्या 15 जून को, सर्वार्थ सिद्धि योग में

    2. पितरों की शांति हेतु तर्पण, दान और मंत्र जाप करें

    3. दक्षिण दिशा में मुख कर पूर्वजों का ध्यान करें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। यह दिन पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है। इस बार सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है।
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में पुण्य कर्म, अनुष्ठान करने से निश्चित रूप से सफल होते हैं। अगर शुभ संयोग में पितरों की शांति के लिए विशेष काम किए जाएं, तो पूर्वज जल्द प्रसन्न होते हैं, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त और पितरों को प्रसन्न करने की विधि के बारे में।

    somvati amavasya 2026  (3)

     (AI-Generated Image)

    सोमवती अमावस्या 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Somvati Amavasya 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर हुई है और समापन 15 जून को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में आज यानी 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है।
    सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग- 15 जून को सुबह 05 बजाकर 23 मिनट से 07 बजकर 08 मिनट तक

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    पितृ तर्पण विधि

    • सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
    • इसके बाद दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके बैठें, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है।
    • अब एक पात्र में जल लेकर काले तिल, थोड़ा सा दूध, कुशा और फूल मिला लें।
    • इसके बाद पूर्वजों का ध्यान कर दोनों हाथों को मिलाकर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार के सदस्यों को सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।

    जरूर करें इन चीजों का दान

    सोमवती अमावस्या के अवसर पर दान का अधिक महत्व है। इस दिन पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर या गरीब लोगों में गेहूं, चावल, दाल और कपड़े समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं।

    पितृ के मंत्र

    1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

    2. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।

    3. ॐ पितृ देवतायै नम:।

    4. ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।

    5. ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च

    नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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