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    शनि देव के उस वचन का रहस्य, जो हनुमान जी के भक्तों के लिए आज भी माना जाता है शुभ

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 08:59 AM (IST)

    हनुमान जी की भक्ति करने वालों से शनिदेव क्यों प्रसन्न रहते हैं? जानिए उस पौराणिक वचन का रहस्य जो आज भी हनुमान भक्तों को शनि दोष और कष्‍टों से बचाता है ...और पढ़ें

    हनुमान जी की उपासना से कम होता है शनि दोष का प्रभाव (Picture Credit- AI Generated)

    हनुमान जी की उपासना से कम होता है शनि दोष का प्रभाव (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को संकटमोचन कहा जाता है। श्री बजरंग बली को अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है, उस पर शनि देव की विशेष कृपा बनी रहती है। इसके पीछे एक बहुत ही रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है, जिसमें बताया गया है कि स्वयं शनिदेव ने हनुमान जी को एक ऐसा वचन दिया था, जिसका लाभ आज भी उनके भक्तों को मिल रहा है।

    क्या है शनिदेव और हनुमान जी की कथा?

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका के राजा रावण ने अपने अहंकार और शक्ति के दम पर कई देवी देवताओं पर अत्‍याचार किए थे। वही नवग्रहों को भी बंदी बना लिया था। शनि देव भी नवग्रहों में से एक हैं और इन्‍हें न्‍याय एवं कर्मों का देवता कहा जाता है। रावण इस बात से डरता भी था, इसलिए उसने अपने कैद में शनि देव को उल्‍टा लटका दिया था, ताकि उसके ऊपर शनि का कोई भी गलत प्रभाव न पड़ सके। रावण इतना क्रूर था कि उसने सभी नवग्रहों की शक्तियां भी छीन ली थीं, बस शनि देव को ही अपने वश में नहीं कर पा रहा था।

    मान्यतानुसार, शनि देव के प्रभावों को नष्‍ट करने के लिए रावण ने उन्‍हें बहुत यातनाएं दी थीं, कभी अपनी पांव के नीचे उनकी गर्दन दबाई थी कभी उनपर गदे से वार किया था। आखिर में जब रावण ने शनि देव को उल्‍टा लटका दिया, तो उनका प्रभाव भी सब उल्‍टा ही पड़ रहा था। रावण गलत करता जा रहा था और उसके साथ सब अच्‍छा-अच्‍छा हो रहा था।

    जब माता सीता की खोज में भगवान श्रीराम के दूत के रूप में हनुमान जी लंका पहुंचे,उन्होंने वहां रावण के अत्याचारों को देखा। इसी दौरान उनकी दृष्टि शनिदेव और अन्य ग्रहों पर भी पड़ी, जिन्हें रावण ने बंदी बनाकर रखा था। हनुमान जी ने अपने बल से न केवल लंका में उत्पात मचाया, बल्कि शनिदेव सहित सभी ग्रहों को भी कैद से मुक्त करा दिया। इस उपकार से शनिदेव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने हनुमान जी को इस मदद के लिए धन्‍यवाद कहा।

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    शनि देव ने हनुमान जी को क्‍या वचन दिया था?

    इस मदद के बदले में शनिदेव ने हनुमान जी को एक विशेष वचन दिया था। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे वे कभी कष्ट नहीं देंगे। साथ ही, ऐसे भक्तों पर शनि की कुदृष्टि नहीं पड़ेगी और साढ़ेसाती या ढैया जैसे कठिन समय का प्रभाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा। यही कारण है कि हिंदू धर्म में हनुमान जी की उपासना को शनि दोष से राहत पाने का प्रभावी उपाय माना जाता है।

    अतः जिन लोगों की कुंडली में शनि की महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उन्हें नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ और सुंदरकांड का पाठ जरूर करना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।