जामवंत को दिया था श्री राम ने वचन, श्रीकृष्ण को करना पड़ा था पूरा; अंत में हो गए थे बर्बाद
त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने जामवंत जी को एक युद्ध का वचन दिया था, जिसे द्वापरयुग में श्री कृष्ण अवतार में 28 दिनों के भीषण युद्ध द्वारा पूरा किया ...और पढ़ें
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इसी वचन को पूरा करने के कारण द्वारिका का अंत हुआ। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान विष्णु के अवतार श्री राम और श्री कृष्ण का जन्म अलग-अलग युग में हुआ था। जहां त्रेता युग में श्री राम का जन्म हुआ था वहीं द्वापर युग में श्री कृष्ण का अवतार लेकर श्री हरि विष्णु मनुष्य रूप में धरती पर आए थे। हालांकि जब त्रेता युग का अंत हुआ तो श्री राम ने सरयू नदी में जल समाधि ले ली, श्री राम के साथ ही उनके तीनों भाई, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण भी बैकुंठ चले गए। लेकिन कुछ लोग, जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त था, वह द्वापर युग और कलियुग में भी उपस्थित रहे। इनमें से एक थे जामवंत। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के 56वें अध्याय में उल्लेख मिलता है कि द्वापरयुग में श्री कृष्ण और जामवंत का युद्ध हुआ था। इस युद्ध के दौरान जामवंत ने श्री कृष्ण को त्रेता युग में उनके द्वारा दिया एक वचन याद दिलाया था। इसी वचन को पूरा करने के कारण द्वापर युग और श्रीकृष्ण की द्वारिका का अंत हुआ।
श्रीराम ने क्या दिया था जामवंत को वचन?
लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए श्री राम की मदद के लिए पूरी वानर सेना थी। इस सेना के सबसे वृद्ध और बुद्धिमान वानर जामवंत थे। श्री राम नहीं चाहते थे कि युद्ध के वक्त कोई अनहोनी हो जाए, क्योंकि जामवंत की सलाह के बिना रावण से युद्ध जीतना मुश्किल था। ऐसे में श्री राम ने जामवंत से युद्ध में भाग न लेने की प्रार्थना की थी। इसके साथ उन्होंने जामवंत को एक वचन भी दिया था कि द्वापर युग में, जब वो श्री कृष्ण के रूप में जन्म लेंगे, तब वह खुद उनसे युद्ध करेंगे और हारेंगे, फिर जो जामवंत चाहेंगे वही होगा।
द्वापर युग में श्री कृष्ण को जामवंत का कौन सा वचन करना पड़ा था पूरा?
श्री कृष्ण और जामवंत के बीच एक स्यमंतक मणि को लेकर युद्ध हुआ था। यह युद्ध 28 दिन तक चला। भगवान श्री कृष्ण जब जामवंत को हरा नहीं पाए, तब जामवंत ने ही उन्हें त्रेता युग का वचन याद दिलाया। इसके बाद श्री कृष्ण ने जीत के बदले में कुछ वरदान मांगने के लिए कहा, तब जामवंत ने अपनी बेटी जामवंती से विवाह करने की बात कही। इस तरह से जामवंती और श्री कृष्ण का विवाह हुआ।
वचन पूरा करने का क्या परिणाम श्रीकृष्ण को भुगतना पड़ा?
श्रीकृष्ण ने जामवंती से विवाह तो कर लिया था, मगर उनकी कोई संतान नहीं थी। इस बात को लेकर जब श्रीकृष्ण ने जामवंती को दुखी देखा तो उन्होंने शिव जी की तपस्या की और शिव जी ने तब प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण और जामवंती को एक पुत्र दिया, जिसका नाम सांब रखा गया। सांब शिव जी के नौवें रुद्र थे। दिखने में बेहद आकर्षक और स्वभाव में श्रीकृष्ण की तरह ही उद्दंड थे। उन्हें ऋषि दुर्वासा का श्राप मिला था। अपनी अठखेलियों की वजह से सांब ने एक दिन अपने दोस्तों के साथ गर्भवती स्त्री का वेश धारण किया और ऋषि दुर्वासा के शक्ति को परखने के लिए उनसे पूछा कि "मेरे गर्भ में क्या है? " तब उन्होंने सांब को श्राप दिया कि उनके गर्भ से लोहे का मूसल उत्पन्न होगा और वह संपूर्ण यदुवंश का विनाश करेगा।जब ऋषि दुर्वासा का श्राप सिद्ध हुआ तो पूरी द्वारका ही समुद्र में समा गई।
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अतः इस तरह से जामवंत के वचन को पूरा करने के कारण ही श्रीकृष्ण को अपनी द्वारका गंवानी पड़ी। हालांकि, यह नियति में लिखा था और श्रीकृष्ण को महाभारत युद्ध के वक्त गांधारी ने श्राप भी दिया था कि जिस तरह से कौरवों का अंत हुआ है, ठीक उसी प्रकार से एक दिन यदुवंश का भी सर्वनाश होगा।
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