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    रविवार के दिन ऐसे करें सूर्य देव की पूजा, चमक जाएगी सोई हुई किस्मत

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 10:33 AM (IST)

    सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, जो सफलता, मान-सम्मान और आरोग्य के कारक हैं। ...और पढ़ें

    Ravivar Donts: रविवार को न करें ये गलतियां। (Ai Generated Image)

    Ravivar Donts: रविवार को न करें ये गलतियां। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं

    2.  'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जप करें


    3. रविवार के दिन लाल वस्तुओं का दान करें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सूर्य देव को 'प्रत्यक्ष देवता' माना गया है, क्योंकि वे साक्षात दिखाई देते हैं। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सफलता, मान-सम्मान, पिता और आरोग्य का कारक माना जाता है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि अगर इस दिन पूरी श्रद्धा और सही विधि से सूर्य उपासना की जाए, तो व्यक्ति की सोई हुई किस्मत चमक सकती है और जीवन के हर क्षेत्र में उसे विजय प्राप्त होती है। ऐसे में भगवान सूर्य की विधिवत पूजा करें और आरती से पूजा का समापन करें।

    रविवार के दिन क्या न करें?

    सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए जितनी जरूरी पूजा है, उतने ही जरूरी कुछ नियम भी हैं। रविवार के दिन सूर्यास्त के बाद नमक का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही, इस दिन बाल कटवाना या तेल मालिश करना भी शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूरी बनाए रखें।

    ।भगवान सूर्य देव की आरती।। (Bhagwan Surya Dev Ji Ki Aarti)

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    ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

    जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

    धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

    अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

    फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

    गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

    स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

    प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

    वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

    ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

    जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

    धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।