Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    वाल्मीकि रामायण में छिपा है अजेय होने का राज, श्रीराम जी ने युद्धभूमि में क्यों किया आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को युद्धभूमि में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की सलाह दी थी ताकि वे रावण पर विजय प्राप्त कर सकें। इस स्तोत्र के पाठ ...और पढ़ें

    भगवान राम से जुड़ा है आदित्य हृदय स्तोत्र का खास महत्व (Picture Credit: AI Generated)

    भगवान राम से जुड़ा है आदित्य हृदय स्तोत्र का खास महत्व (Picture Credit: AI Generated)

    HighLights

    1. महर्षि अगस्त्य ने श्रीराम को स्तोत्र का पाठ बताया।

    2. युद्ध में रावण पर विजय हेतु श्रीराम ने पाठ किया।

    3. आदित्य हृदय स्तोत्र से मिलती है सूर्य देव की कृपा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना विधिपूर्वक आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से इंसान के जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही व्यक्ति को कारोबार और करियर में तरक्की होती है।

    वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड के अनुसार, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने के लिए महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को रावण के विरुद्ध युद्ध में विजयी होने और चिंता को दूर करने के लिए कहा था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महर्षि अगस्त्य ने राम जी को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने के लिए क्यों कहा था। ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

    राम जी ने इसलिए किया आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ

    महर्षि अगस्त्य ने आदित्य हृदय स्तोत्र की रचना की थी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब रावण और भगवान श्रीराम के बीच लंबे समय तक द्ध चल रहा था,तो युद्भूमि में रावण अपने पूरे बल और अस्त्र-शस्त्रों के साथ फिर से लड़ने के लिए सामने खड़ा था। वहीं, भगवान श्रीराम युद्ध के दौरान थक गए थे। इस दौरान भगवान चिंतन कर रहे थे कि किस तरह से रावण का वध किया जाए।

    यह भी पढ़ें- क्या वाल्मीकि रामायण में है 'लक्ष्मण रेखा' का जिक्र? पढ़िए रामायण के 4 बड़े मिथक

    देवी-देवता और महर्षि अगस्त्य रावण और भगवान श्रीराम के बीच चल रहे युद्ध को देख रहे थे। श्रीराम को इस प्रकार थका हुआ देखकर महर्षि अगस्त्य युद्धभूमि में में राम जी के पास आए। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीराम से सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने के लिए कहा। उन्होंने श्रीराम को यह स्तोत्र इसलिए दिया ताकि सूर्य देव की स्तुति करके वे अपने भीतर फिर से अनंत ऊर्जा, तेज और प्राणशक्ति जाग्रत कर सकें।

    खबरें और भी

    शत्रु पर अचूक विजय- महर्षि अगस्त्य ने श्रीराम को कहा कि इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही उन्होंने बताया गया कि इसका पाठ करने से व्यक्ति युद्ध में अजेय हो जाता है और उस पर कभी किसी भी तरह का संकट नहीं आता।

    वाल्मीकि रामायण में मिलता है वर्णन

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगस्त्य ऋषि के द्वारा आदित्य हृदय स्तोत्र की रचना का वर्णन वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड के पांचवे सर्ग में मिलता है।

    यह भी पढ़ें- जब बार-बार किस्मत से हो शिकायत, तो श्रीराम के जीवन से जुड़ी ये घटनाएं बदल देंगी आपके सोचने का नजरिया

    यह भी पढ़ें- हनुमान से लेकर जटायु तक: प्रभु श्री राम के 10 करीबी सहयोगी, जिनके बिना अधूरी थी रावण पर जीत

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।