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    दीवाली के समान फलदायी है वरलक्ष्मी व्रत, जानें इस साल कौन सी 3 खास घटनाएं बनाएंगी इसे और भी शुभ

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 09:00 AM (IST)

    वरलक्ष्मी व्रत 2026 में 28 अगस्त को श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाएगा, जो मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी रूप को समर्पित है। इस दिन श्रावण पूर्णिमा ...और पढ़ें

    वर लक्ष्मी व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

    वर लक्ष्मी व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल वरलक्ष्मी व्रत श्रावण महीने के आखिरी शुक्रवार को रखा जाता है, जो मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी रूप को समर्पित है। इस दिन भक्त पैसा और समृद्धि के लिए मां वरलक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं।

    साल 2026 में यह मौका तीन महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं के साथ देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं तिथि और व्रत के लिए आदर्श मुहूर्त के बारे में।

    वर लक्ष्मी 2026 तिथि

    हिंदू पंचांग के मुताबिक, सावन माह के आखिरी शुक्रवार को 28 अगस्त पड़ रहा है, जो मां वर लक्ष्मी का दिन है। यह दिन श्रावण मास के समाप्त होने का भी प्रतीक है।

    वरलक्ष्मी व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त

    इस दिन स्थिर लग्न में देवी लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अनुष्ठान के लिए चार शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

    • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 12 मिनट तक
    • अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक
    • सिंह लग्न- सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 7 बजकर 29 मिनट तक
    • वृश्चिक लग्न- दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 23 मिनट तक
    • कुंभ लग्न- शाम 6 बजकर 9 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 37 मिनट तक
    • वृषभ लग्न- रात 10 बजकर 37 मिनट से लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक

    वरलक्ष्मी व्रत के दिन होने वाली खास खगोलीय घटनाएं

    इस साल वरलक्ष्मी व्रत कई खास खगोलीय घटनाओं के साथ आने वाला है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि (पूर्ण चांद वाला दिन) को आता है, जिसका अर्थ है कि, श्रावण पूर्णिमा से जुड़ी रस्में जैसे पवित्र स्नान और दान पुण्य किए जाएंगे।

    इसके साथ ही 'श्रावणी उपाकर्म' की रस्म भी होगी, जिसमें नया पवित्र धारा (जनेऊ) पहनना, वेदों के अध्ययन का संकल्प लेना और ऋषि-तर्पण जैसे अनुष्ठान शामिल हैं। इसके साथ ही यह दिन रक्षा बंधन के साथ पड़ रहा है, जो भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है।

    इसके अलावा इस दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। भले ही यह भारत में दृश्यमान नहीं होगा और न ही सूतक काल का प्रभाव देखने को मिलेगा। इसलिए इस दिन आराम से व्रत-त्योहार मनाया जा सकेगा।

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    वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

    वरलक्ष्मी व्रत के दिन की जाने वाली पूजा को दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समान ही माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत को रखने और देवी वरलक्ष्मी का सम्मान करने से दुख और गरीबी दूर होती है। इसके अळावा भक्त मां वरलक्ष्मी से खुशहाल जीवन की कामना के लिए भी इस दिन व्रत रखते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।