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    वट सावित्री व्रत: पति की लंबी उम्र के लिए बरगद पर बांधें रक्षा सूत्र, नोट करें पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

    Updated: Thu, 14 May 2026 11:26 AM (GMT+05:30)

    वट सावित्री व्रत 2026 की संपूर्ण पूजा सामग्री लिस्ट और विधि। जानें क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा और कैसे सावित्री ने यमराज से बचाए थे सत्यवान ...और पढ़ें

    वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री (AI-Generated)

    वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री (AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर पति को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    सावित्री और सत्यवान की अटूट श्रद्धा की कथा

    यह पावन व्रत देवी सावित्री के अपने पति सत्यवान के प्रति समर्पण की याद दिलाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने अपनी बुद्धिमानी और दृढ़ संकल्प से उन्हें विवश कर दिया। अंततः यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। माना जाता है कि सावित्री को उनके पति के जीवन का वरदान एक वट (बरगद) के पेड़ के नीचे ही मिला था, इसीलिए इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है।

    पूजा सामग्री की चेकलिस्ट

    वट सावित्री व्रत पूजा शुरू करने से पहले इन चीजों को एकत्रित कर लेना चाहिए ताकि अनुष्ठान में कोई बाधा न आए:

    मूर्तियां: सत्यवान और सावित्री की सुंदर प्रतिमा।

    वट वृक्ष: वास्तविक बरगद का पेड़ या उसकी एक टहनी।

    वस्त्र और सुहाग: सवा मीटर का कपड़ा, लाल या पीली नई चुनरी और सुहाग का पूरा सामान (सिंदूर, चूड़ी आदि)।

    पूजन द्रव्य: रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल), धूप, मिट्टी का दीपक और घी।

    खाद्य पदार्थ: फल, फूल, माला, भीगे हुए चने, मिठाई, सूखे मेवे और पंचामृत।

    अन्य सामग्री: सूत का लाल धागा (कलावा), जल से भरा कलश, दो सिंदूरी जल के पात्र और बांस का बना एक हाथ पंखा।

    पूजा की सरल विधि

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद महिलाओं को पूर्ण श्रृंगार करना चाहिए। इसके बाद वट वृक्ष के पास जाकर उसकी जड़ों में जल, दूध, हल्दी और कुमकुम चढ़ाना चाहिए। पूजा का सबसे मुख्य हिस्सा परिक्रमा है, जिसमें वृक्ष के चारों ओर सात बार घूमते हुए लाल धागा बांधा जाता है। इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है और अंत में चने व मिठाई का भोग लगाकर व्रत खोला जाता है।

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    (AI-Generated Image)

    पूजा से जुड़ी खास बातें

    • बरगद की पूजा हमारी संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
    • बांस के पंखे का उपयोग परिवार के प्रति सेवा और समर्पण को दर्शाता है।
    • साथ मिलकर कथा सुनने से समाज में प्रेम और सकारात्मकता बढ़ती है।
    • सूत का धागा पति-पत्नी के जन्म-जन्मांतर के साथ का प्रतीक माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।