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    Vrat Rules 2026: व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? पढ़ें उपवास के वो नियम जो हर भक्त को पता होने चाहिए

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 12:02 PM (IST)

    Vrat Ke Niyam: व्रत के दौरान अक्सर हम अनजाने में कुछ गलतियां कर देते हैं। पढ़ें शास्त्रों के अनुसार, व्रत के सही नियम, क्या करें और क्या न करें, ताकि ...और पढ़ें

    Fasting Rules: व्रत के नियम (Image Source: AI-Generated)

    Fasting Rules: व्रत के नियम (Image Source: AI-Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। धार्मिक शास्त्रों में व्रत को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। अगर नियम सही न हों, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। जानिए व्रत के वक्त किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है।

    व्रत में क्या करें? (Dos)

    • व्रत की शुरुआत हमेशा संकल्प से करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनकर ईश्वर के सामने हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि आप यह व्रत क्यों और कैसे कर रहे हैं। बिना संकल्प के किया गया व्रत अधूरा माना जाता है।
    • व्रत सिर्फ पेट का नहीं, मन का भी होता है। इस दिन गुस्सा करने से बचें और सबसे प्रेम से बात करें। 'शक्ति' की उपासना तभी सफल है जब आपका मन शांत और सकारात्मक हो।
    • अगर आप फलाहार कर रहे हैं, तो कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आंटा, साबूदाना, फल और दूध का सेवन करें। ये शरीर को ऊर्जा (Energy) देते हैं और सात्विक श्रेणी में आते हैं।
    Vrat Rules
     
    (Image Source: AI-Generated)

    व्रत में क्या न करें? (Don'ts)

    • व्रत के दौरान प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यहां तक कि रसोई में भी इन चीजों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। सादा नमक की जगह सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
    • व्रत के दिन शराब, सिगरेट या किसी भी तरह के नशे से कोसों दूर रहें। साथ ही, किसी की चुगली या बुराई करने से मन अशुद्ध होता है और व्रत खंडित हो सकता है।
    • शास्त्रों के अनुसार, व्रत के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इस समय को भजन-कीर्तन या अच्छी धार्मिक किताबें पढ़ने में बिताना चाहिए।

    शास्त्रों के नियम (Source of Rules)

    व्रत और उपवास के ये नियम 'व्रतराज' और 'स्कंद पुराण' जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से बताए गए हैं। 'उपवास' शब्द का संस्कृत अर्थ है- 'उप' (निकट) + 'वास' (रहना), यानी ईश्वर के निकट रहना। सिर्फ खाना छोड़ना उपवास नहीं, बल्कि बुरे विचारों को छोड़कर प्रभु के ध्यान में रहना ही असली उपवास है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।