कहीं आप भी गलत दिशा में तो नहीं कर रहे स्नान? अभी जान लें इससे जुड़े नियम
सनातन धर्म स्नान में स्नान को एक पवित्र आध्यात्मिक अनुष्ठान माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं स्नान से जुड़े नियम के बारे में। ...और पढ़ें

स्नान करते समय ध्यान रखें ये बातें (Picture Credit AI- Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में शरीर की सफाई के लिए स्नान को एक पवित्र अनुष्ठान माना गया है। रोजाना स्नान करने से शरीर की अशुद्धियां धुलती हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा भी जाग्रत होती है। शास्त्रों में स्नान करने के नियम के बारे में बताया गया है।
ऐसा माना जाता है कि सही दिशा की तरफ मुख करके स्नान करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में आइए इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं स्नान करने के विशेष नियम के बारे में, जिससे मन शांत और एकाग्र रहता है।
क्या है स्नान का सही समय?
सनातन शास्त्रों में स्नान का सबसे शुभ समय सूर्योदय से पहले के समय यानी ब्रह्म मुहूर्त को माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से दिन भर मन शांत और एकाग्र रहता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने की सलाह दी जाती है।
नकारात्मक विचार होंगे दूर- नहाने के पानी में गंगाजल ड़ालकर स्नान करें। ऐसा माना जाता है कि गंगाजल के पानी से स्नान करने से जातक की आत्मा की शुद्धि होती है और नकारात्मक विचार कोसों दूर होते हैं। ध्यान रखें कि स्नान करते समय सात पवित्र नदियों का स्मरण जरूर करना चाहिए।
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क्या है स्नान करने की सही दिशा- स्नान के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की तरफ मुख करके स्नान करने से मानसिक तनाव की समस्या दूर होती है, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य और उत्तर दिशा दिव्य शक्तियों का प्रतीक है। इसलिए स्नान करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें। स्नान करने के बाद साफ कपड़े ही धारण करें। अस्वच्छ वस्त्र पहनने से स्नान का आध्यात्मिक लाभ नष्ट हो जाता है।
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स्नान के 4 प्रकार
- सुबह 4 से 5 बजे के बीच के स्नान को मुनि स्नान कहा जाता है। इस दौरान स्नान करने से आत्मिक शांति, बुद्धि और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
- सुबह 5 से 6 बजे के बीच के स्नान को देव स्नान के नाम से जाना जाता है। देव स्नान करने से जातक को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
- सुबह 6 से 8 बजे के बीच के स्नान को मानव स्नान कहा जाता है। इससे शारीरिक शुद्धि होती है।
- सुबह 8 बजे के बाद के स्नान को राक्षसी स्नान होता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।