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    जब विभीषण ने कर दिया था मना, तो फिर किसने किया रावण का अंतिम संस्कार? पढ़ें वो अनसुनी कथा!

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 07:20 PM (IST)

    रावण के वध के बाद जब विभीषण ने उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया, तब श्री राम ने उन्हें धर्म का पाठ पढ़ाया। आइए जानते हैं वो अनसुनी कथा। ...और पढ़ें

    Ramayana Facts: शत्रुता के बाद भी श्री राम ने क्यों निभाया धर्म? (Ai Generated Image)

    Ramayana Facts: शत्रुता के बाद भी श्री राम ने क्यों निभाया धर्म? (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. रावण वध के साथ अहंकार का अंत हो गया

    2. रावण का अंतिम संस्कार कोई करने को तैयार नहीं था

    3. विभीषण भी उसको मुखाग्नि नहीं देना चाहते थे

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भगवान श्री राम के हाथों रावण का वध हुआ, तो अधर्म का अंत हुआ और सत्य की जीत हुई। लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद एक ऐसी स्थिति सामने आई, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। दरअसल, लंकापति रावण का शव रणभूमि में पड़ा था और उसका अंतिम संस्कार करने के लिए कोई भी नहीं तैयार था, यहां तक उसका अपना भाई विभीषण भी। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि रावण के शव का क्या हुआ और किसने दी उसे मुखाग्नि?

    Ramayana Facts 1

    Ai Generated Image

    विभीषण ने क्यों किया था इनकार?

    वाल्मीकि रामायण युद्ध कांड के अनुसार, जब श्री राम ने विभीषण से रावण का अंतिम संस्कार करने को कहा, तो विभीषण भावुक होकर पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि हे प्रभु रावण ने अधर्म का मार्ग चुना, उसने माता सीता का अपहरण किया और ऋषियों-मुनियों को बहुत परेशान किया। ऐसे अधर्मी व्यक्ति का अंतिम संस्कार करके मैं पाप का भागी नहीं बनना चाहता। वह मेरा भाई कहलाने के योग्य नहीं है। विभीषण के मन में रावण के प्रति इतनी नफरत थी कि उन्होंने साफ मना कर दिया कि वे उसे मुखाग्नि नहीं देंगे।

    श्री राम ने सिखाया धर्म का असली मतलब

    विभीषण की बात सुनकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने उन्हें समझाया। श्री राम ने एक ऐसा वाक्य कहा जो आज भी मानवता की सबसे बड़ी सीख माना जाता है। उन्होंने कहा कि

    'मरणान्तानि वैराणि निर्वृत्तं नः प्रयोजनम्। क्रियतामस्य संस्कारो ममाप्येष यथा तव॥'

    अर्थात् "मृत्यु के साथ ही दुश्मनी समाप्त हो जाती है। हमारा उद्देश्य पूरा हो चुका है। अब यह मेरा भी वैसा ही भाई है जैसा तुम्हारा। इसलिए इसका अंतिम संस्कार पूर्ण सम्मान के साथ होना चाहिए।"

    श्री राम ने समझाया कि रावण भले ही शत्रु था, लेकिन वह एक बहुत बड़ा विद्वान और वेदों का ज्ञाता भी था। उसकी मृत्यु के बाद अब उससे कोई दुश्मनी नहीं रखनी चाहिए।

    किसने किया अंतिम संस्कार?

    श्री राम की बातों को सुनकर विभीषण की आंखें खुल गईं। उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ कि मृत्यु के बाद किसी भी जीव के प्रति बुरे भाव रखना अधर्म है। भगवान राम के समझाने के बाद विभीषण ने ही रावण का अंतिम संस्कार पूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान के साथ किया। लंका के ब्राह्मणों और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में रावण की देह को अग्नि दी गई।

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