आरती लेने के बाद हाथों को आंखों और सिर पर क्यों लगाया जाता है? जानिए इसके धार्मिक कारण
आरती के बाद हाथों को आंखों और सिर पर लगाने के पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह अग्नि तत्व, ...और पढ़ें

आरती के बाद के बाद के नियम और धार्मिक महत्व (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूजा-पाठ के सभी नियमों में से एक है सही तरीके से आरती करना। किसी भी पूजा के समापन में आरती करने को पूजा की पूर्णता माना जाता है और जब आरती समाप्त होती है तब इसे भक्तों के सामने आशीर्वाद के रूप में रखा जाता है। हम सभी अपने दोनों हाथों से आरती लेते हैं और हाथ आंखों और सिर में लगाते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि हम आरती की उस लौ को छूकर उसकी गर्माहट को अपनी आंखों और माथे पर क्यों लगाते हैं? हममें से ज्यादातर लोग ऐसा करते हैं और मंदिर में पंडित और ज्योतिषी भी आरती लेने के इस तरीके को सबसे सही मानते हैं। हालांकि, शायद ही कोई इसके कारणों के बारे में जानता हो। आइए आपको बताते हैं आरती लेने के बाद हाथों को सिर और आंखों में लगाना जरूरी क्यों होता है और इसका महत्व क्या है?
आरती के दीपक में अग्नि तत्व
जब भी हम घर या मंदिर में आरती करते हैं तो यह ईश्वर का आह्वाहन करना होता है। आरती के माध्यम से भक्त या पंडित ईश्वर को पूजा की पूर्णता के लिए आमंत्रित करते हैं और ईश्वरीय आशीर्वाद की कामना करते हैं।
ऐसे में आरती में जो दीपक जलाया जाता है वो अग्नि तत्व को दिखाता है और दीपक से निकलने वाली लौ केवल एक साधारण आग न होकर ईश्वर का आशीर्वाद भी देती है। जब हम आरती लेने के बाद अपने दोनों हाथ अपनी आंखों और माथे पर लगाते हैं तब यह आशीर्वाद की स्वीकृति होता है।
आरती की लौ ईश्वरीय प्रसाद
जब आरती के दौरान किसी भी देवी-देवता के सामने आरती की लौ घुमाई जाती है, तब शास्त्रों के अनुसार वह प्रकाश 'प्रसाद' बन जाता है और जब भक्त आरती के बाद इसे अपने हाथ से लेकर आंखों और सिर पर लगाते हैं तो यह ईश्वर की ओर से मिला एक पवित्र उपहार होता है।
आरती की लौ सबसे पहले ईश्वर को छूती है और उस पूजा की पवित्रता को ग्रहण करती है। फिर मंदिर में मौजूद पुजारी उसी लौ को हमें देते हैं क्योंकि ईश्वरीय आशीर्वाद भक्तों तक पहुंचना जरूरी होता है। जब हम आरती की लौ की उस गर्माहट को अपनी आंखों में लगाते हैं, तो ईश्वर से अपनी कुशलता का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
शरीर और मन की शुद्धि
आरती की लौ आंखों और माथे पर लगाना शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए जरूरी होता है। इससे हमारा मन किसी भी विकार से दूर होता है और ईश्वर को समर्पित हो जाता है। आरती की लौ कोई साधारण अग्नि नहीं होती है बल्कि अग्नि देवता का अपने भक्तों के लिए आशीर्वाद होता है जो भक्तों को परेशानियों से निकलने का आश्वासन देता है।
किसी भी देव की आरती सिर्फ देखने की चीज नहीं होती है बल्कि इसे ग्रहण करना जरूरी होता है और यह ईश्वर की कृपा पाने का एक सबसे आसान तरीका है।
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