दूसरों के घर का पानी पीने से क्यों रोकते थे बड़े-बुजुर्ग? जानिए इसके पीछे की वजह
बड़े-बुजुर्गों की मान्यता है कि दूसरों के घर का पानी नहीं पीना चाहिए, आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण?

दूसरों के घर का पानी क्यों नहीं पीना चाहिए? (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हमने अपने घर में कभी न कभी बड़े बुजुर्गों से यह जरूर सुना होगा कि, किसी के घर का पानी नहीं पीना चाहिए। इस तरह की मान्यताओं के पीछे कई तरह के तर्क दिए जाते हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि, दूसरों के घर का पानी पीने से नकारात्मक ऊर्जा हावी हो सकती है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
दूसरों के घर का पानी क्यों नहीं पीना चाहिए?
कुछ लोगों का मानना है कि, जिस घर में तनाव, कलह, क्लेश और नकारात्मक ऊर्जा का वातावरण रहता है, वहां का पानी भी उसी स्थान की ऊर्जा के हिसाब से रिएक्ट करता है।
माना जाता है कि, जिन घरों में आए दिन तनाव, वाद-विवाद और नकारात्मक वातावरण की स्थिति रहती है, उन घरों का पानी पीने से नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति तक भी पहुंच जाती है। सोशल मीडिया पर इस सिद्धांत को वॉटर मेमोरी से जोड़कर देखा जाता है।
पानी 5 तत्वों में शामिल
हिंदू धर्म में पांच मूल तत्वों (पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु) पानी भी शामिल है। माना जाता है कि, पानी शुद्धता और संकल्प का प्रतीक है। ऐसे में पानी अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों की एनर्जी को सोखता है।
मॉर्डन रिसर्च और पारंपरिक तरीकों दोनों में ही बताया गया है कि, पानी पीते समय हमेशा पॉजिटिव और अच्छा इरादा रखना जरूरी है, ताकि वह शरीर में तनाव की जगह जीवन शक्ति और सेहत का जरिया बनें।
आधुनिक दौर में इस अवधारणा को पुराना मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता था, लेकिन घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा कुछ खास जगहों पर पानी न पीने की सलाह देते थे, क्योंकि यह छोटी-सी आदत हमारी रोजमर्रा के जीवन की आदतें और मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव दिखा सकती है।

सनातन धर्म में पानी का महत्व
सनातन धर्म में किसी भी बड़ी कसम या संकल्प के लिए गंगाजल लिया जाता था। क्योंकि पानी पंच तत्वों में से एक होने के कारण हमारी भावनाओं को सोख लेता है। हालांकि इसका मतलब यह भी नहीं होना चाहिए कि, कोई पानी दे तो उसे पीने से मना कर दें।
जब किसी दूसरों के यहां का पानी पीएं तो पानी को हाथ में रखकर सकारात्मक विचार या भगवान का नाम लेकर पीएं। ऐसा करने से पानी की नकारात्मक ऊर्जा पॉजिटिव हो जाएगी।
यह भी पढ़ें- शनिवार को ही क्यों खाया जाता है लिट्टी-चोखा? क्या है इसके पीछे का धार्मिक और ज्योतिषीय रहस्य
यह भी पढ़ें- हिंदू धर्म में किन दिनों में नहीं बनाई जाती रोटी? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।