मथुरा और गोकुल में अलग-अलग दिन क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी? पढ़ें ब्रज का यह अनूठा रहस्य
भाद्रपद माह में मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मथुरा और गोकुल में अलग-अलग दिन होती है। मथुरा में भगवान कृष्ण ...और पढ़ें
-1787478779114_m.webp)
मथुरा और गोकुल जन्माष्टमी का महत्व (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मथुरा में श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में, इसलिए पहले मनाते हैं।
गोकुल में जन्म की सूचना अगले दिन मिली, तब मनाते हैं।
मथुरा में महाभिषेक, गोकुल में नंदोत्सव के रूप में पर्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद माह में श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) का पर्व देशभर में अधिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। साथ ही प्रभु की कृपा प्राप्त करने के लिए लोग सच्चे मन से व्रत रखते हैं। इस व्रत को करने से भक्तों को जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। इस खास अवसर पर ब्रजभूमि में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है।
इस पर्व के लिए ब्रज के मंदिरों को सजाया जाता है। कृष्ण उत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जन्माष्टमी का पर्व मथुरा और गोकुल में अलग-अलग दिन मनाया जाता है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि इस पर्व को मथुरा और गोकुल में अलग-अलग दिन मनाने की क्या वजह है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे का कारण।
-1787478955334.webp)
मथुरा और गोकुल की जन्माष्टमी में अंतर
पवित्र नगरी मथुरा भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है। पौराणिक कथा के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कंस के कारागार में आधी रात को हुआ था। इसी वजह से मथुरा में एक दिन पहले धूमधाम के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मथुरा में मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और महाभिषेक किया जाता है। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशखबरी गोकुल वासियों को अगली सुबह मिली थी। इस वजह से गोकुल में जन्माष्टमी का पर्व अगले दिन सुबह नंदोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
यह भी पढ़ें- जन्माष्टमी से लेकर वामन जयंती तक: एक ही महीने में आ रही हैं 8 बड़ी जयंतियां, नोट कर लें डेट्स
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को श्री कृष्ण जन्मभूमि में भगवान श्रीकृष्ण का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से महाभिषेक किया जाता है। इस दौरान शंख और घंटे बजाए जाते हैं और मंत्रोच्चारण किया जाता है। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। हर भक्त के मुंह से हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की और नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की सुनने को मिलता है। वहीं, अगले दिन सुबह गोकुल में जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है और लोग ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते हैं।
मथुरा और गोकुल में कब है जन्माष्टमी 2026?
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर (Mathura Janmashtami 2026 Date) को मनाया जाएगा। वहीं, गोकुल में जन्माष्टमी 5 सितंबर को मनाई जाएगी।
यह भी पढ़ें- पंचामृत स्नान से लेकर शयन तक, जन्माष्टमी पर घर में इस विधि से करें लड्डू गोपाल की स्थापना
यह भी पढ़ें- क्या आपको पता है श्रीकृष्ण को क्यों पसंद है माखन? पढ़ें भगवान के माखनचोर बनने की असली कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
