पौराणिक कथा: जब 56 भोग से भी नहीं शांत हुई बजरंगबली की भूख, फिर माता सीता ने किया था ये चमत्कार
क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की पूजा तुलसी के बिना अधूरी क्यों मानी जाती है? पढ़ें तुलसी के पत्ते और 'राम' नाम की वह अद्भुत कथा। ...और पढ़ें

तुलसी दल से कैसे शांत हुई हनुमान जी की भूख? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान जी की पूजा में बहुत सी चीजें चढ़ाई जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा तुलसी का पत्ता उनके लिए सबसे बड़ा भोग माना जाता है? भक्तों का मानना है कि तुलसी के बिना बजरंगबली की पूजा पूरी नहीं होती। आखिर क्यों हनुमान जी को तुलसी इतनी प्रिय है? इसके पीछे एक बहुत ही सुंदर पौराणिक कथा है।
जब 56 भोग से भी नहीं मिटी हनुमान जी की भूख
यह कथा उस समय की है जब रावण पर विजय पाकर भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी के साथ अयोध्या वापस लौट आए थे। एक दिन माता सीता ने प्यार से हनुमान जी को भोजन पर बुलाया। उन्होंने हनुमान जी के लिए 'छप्पन भोग' और ढेरों स्वादिष्ट पकवान बनाए।
हनुमान जी भोजन करने बैठे और देखते ही देखते उन्होंने सारा खाना समाप्त कर दिया, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि उनका पेट अभी भी नहीं भरा था। माता सीता ने फिर से ढेर सारा भोजन बनाया, हनुमान जी उसे भी खा गए। धीरे-धीरे स्थिति यह हो गई कि महल के अन्न भंडार खाली होने लगे, लेकिन हनुमान जी की भूख शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। माता सीता यह देखकर चिंता में पड़ गईं।

(Image Source: AI-Generated)
एक छोटे से पत्ते ने किया चमत्कार
जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो माता सीता ने भगवान राम से मदद मांगी। तब राम जी ने मुस्कुराते हुए हनुमान की भूख शांत करने का एक गुप्त उपाय बताया।
राम जी के कहे अनुसार, माता सीता ने तुलसी का एक पत्ता लिया और उस पर बड़े प्रेम से 'राम' नाम लिख दिया। जैसे ही हनुमान जी ने वह पत्ता ग्रहण किया, उनकी भूख तुरंत शांत हो गई और उन्हें परम तृप्ति मिली।
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तब से बनी ये परंपरा
तब से यह परंपरा बन गई कि हनुमान जी को भोग में तुलसी जरूर चढ़ाई जाती है। माना जाता है कि जो भी भक्त उन्हें प्रेम से तुलसी अर्पित करता है, बजरंगबली उस पर अपनी कृपा तुरंत बरसाते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।