इस एक वजह से हुआ था भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म, शिव महापुराण में छिपा है रहस्य
शिव महापुराण के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का जन्म तारकासुर राक्षस का वध करने के उद्देश्य से हुआ था। वे शिव और पार्वती की दिव्य ऊर्जा से उत्पन्न हुए और छ ...और पढ़ें

शिव महापुराण: जानें भगवान कार्तिकेय के जन्म का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे पुराणों में कई ऐसे पात्र मिलते हैं जिनके जन्म का एक विशेष उद्देश्य होने के साथ उनकी रचना का एक अलग कारण भी माना जाता है। ऐसे ही शिव महापुराण में भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय के जन्म की कथा बताई गई है जो उनके जन्म के उद्देश्य को भी पूर्ण करती है।
शिव पुराण के कुमार-खंड के अध्याय 1 से 6 में शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय के जन्म से लेकर उनके राज्याभिषेक की कथा तक का वर्णन मिलता है जो उनकी महिमा का बखान भी करता है।
पुराणों की मानें तो जब भगवान शिव द्वारा नियंत्रित पंच महाभूत- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का मिलन शक्ति यानी माता पार्वती से हुआ, तब भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। आइए आपको बताते हैं कार्तिकेय के जन्म की अद्भुत कहानी और उनके जन्म के उद्देश्य के बारे में।
भगवान कार्तिकेय के जन्म का उद्देश्य क्या था?
कार्तिकेय के जन्म का सबसे बड़ा उद्देश्य तारकासुर नाम के राक्षस का वध करना था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय तारकासुर वरदान की वजह से अजेय हो गया था। उसे वरदान मिला था कि केवल शिव और पार्वती का पुत्र ही उसे मार सकता है।
उस समय, शिव गहरे ध्यान में लीन थे और उनकी संतान का जन्म संभव नहीं था। ब्रह्मांड की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए, माता पार्वती ने अपनी दिव्य ऊर्जा से एक बालक को प्रकट करने का निर्णय लिया। उन्होंने कठोर तपस्या की और उन शक्तियों का आह्वान किया जिनकी जरूरत तारकासुर को हराने में सक्षम योद्धा को बनाने के लिए थी।
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भगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?
अजेय राक्षस तारकासुर का वध करने के लिए भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा से भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। तारकासुर का वध केवल शिव के पुत्र द्वारा ही किया जा सकता था।
उनकी प्रचंड और तेजस्वी ऊर्जा को उस समय अग्नि देव और गंगा ने धारण किया, छह कृतिकाओं ने मिलकर कार्तिकेय का लालन-पालन किया और देवी पार्वती ने उन्हें छह मुख वाले योद्धा के रूप में मिलाया। शिव को 'पंचानन' कहा जाता है -जिसका मतलब हुआ पांच सिरों वाले देवता। ये पांच सिर प्रकृति के पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब ये पंच तत्व छठे तत्व के साथ मिले, तो 'षडानन' यानी छह सिरों वाले कार्तिकेय का जन्म हुआ।
कार्तिकेय ने छह मुख क्यों धारण किए?
कार्तिकेय का लालन-पालन छह कृतिकाओं के हाथ में आया उस समय वो सभी कार्तिकेय को एक साथ स्तनपान कराना चाहती थीं, जो संभव नहीं था। इसलिए कार्तिकेय ने छह मुख धारण किए।
अपने जन्म के कुछ सालों बाद कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर चले गए; वहां उन्होंने पर्वत को चकनाचूर करके अपनी वीरता का प्रदर्शन किया, जिससे अनगिनत राक्षस डर से कांप उठे और मारे गए। उस समय इंद्र ने अपने 'वज्र' से युद्ध करके उनकी वीरता की परीक्षा ली। आगे चलकर कार्तिकेय ने तारकासुर नाम के राक्षस का वध किया और उन्हें कैलाशपुरी का 'सेनापति' घोषित किया गया।
कार्तिकेय के जन्म की एक मुख्य वजह राक्षस तारकासुर का वध करने था और आगे चलकर वो एक महान योद्धा के रूप में सामने आए।
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