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    सिर्फ धागा नहीं है जनेऊ: जानें यज्ञोपवीत धारण करने के वे कठोर नियम, जिनका पालन करना है जरूरी

    Updated: Wed, 06 May 2026 05:00 PM (IST)

    जनेऊ धारण करना मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कठिन अनुशासन का मार्ग है। आइए इसके नियम जानते हैं। ...और पढ़ें

    यज्ञोपवीत नियम: कान पर क्यों लपेटा जाता है जनेऊ? Ai Generated Image

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें यज्ञोपवीत यानी जनेऊ धारण करने का महत्वपूर्ण स्थान है। जनेऊ को मात्र एक सूती धागा समझना भूल है, यह व्यक्ति के आध्यात्मिक और नैतिक उत्तरदायित्वों का प्रतीक है। इसे धारण करने के बाद व्यक्ति का दूसरा जन्म माना जाता है। हालांकि, जनेऊ धारण करना जितना शुभ है, इसके नियमों का पालन करना उतना ही कठिन और जरूरी है। अगर इन नियमों में कोई भूल होती है, तो इसे शास्त्र में अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे में आइए इससे जुड़े प्रमुख बातों को जानते हैं।

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    यज्ञोपवीत के पीछे का मतलब और महत्व

    जनेऊ में मुख्य रूप से तीन धागे होते हैं, जो देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, ये तीन धागे सत्व, रज और तम गुणों का प्रतीक माने जाते हैं। इसे धारण करने से व्यक्ति को अपने धर्म और मर्यादा का ध्यान (याद) रहता है।

    धारण करने के कड़े नियम

    वॉशरूम के समय का नियम

    जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा नियम यह है कि वॉशरूम के समय जनेऊ को दाहिने कान पर लपेटना जरूरी है। इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक वजह यह है कि कान की नसें पेट और एकाग्रता से जुड़ी होती हैं। इसे कान पर लपेटने से जनेऊ की पवित्रता बनी रहती है और व्यक्ति अपवित्र होने से बचता है।

    पवित्रता और सफाई

    जनेऊ को कभी भी कमर से नीचे नहीं ले जाना चाहिए। अगर जनेऊ का कोई धागा टूट जाए या गंदा हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। टूटा हुआ जनेऊ पहनना अशुभ माना जाता है।

    सूतक के नियम

    घर में किसी का जन्म होने (सूतक) या मृत्यु होने की स्थिति में जनेऊ अपवित्र हो जाता है। ऐसी स्थिति के पूरा होने पर पुराने जनेऊ को उतारकर विधि-विधान से नया जनेऊ धारण करना चाहिए।

    उतारने का तरीका

    जनेऊ को कभी भी सिर के ऊपर से नहीं उतारना चाहिए। इसे हमेशा पैरों की तरफ से उतारना या चढ़ाना चाहिए। ताकि इसकी पवित्रता खत्म न हो।

    गायत्री मंत्र का जप

    जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। यह जनेऊ की शक्ति और व्यक्ति की ऊर्जा को बनाए रखता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताएं गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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