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    गायत्री जयंती: मानसिक तनाव और भटकाव दूर करता है गायत्री मंत्र, ऋषियों ने इसे बताया है 4 वेदों का सार

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 12:51 PM (IST)

    वेदमाता गायत्री ज्ञान व चेतना की देवी हैं। गायत्री महामंत्र को ऋषियों ने प्राणिमात्र के कल्याण का मंत्र बताया है। यह चेतना को जाग्रत करने वाली दिव्य ऊ ...और पढ़ें

    गायत्री जयंती: गायत्री मंत्र से पाएं मानसिक शांति और विवेक, जीवन में लाएं सकारात्मक बदलाव

    गायत्री जयंती: गायत्री मंत्र से पाएं मानसिक शांति और विवेक, जीवन में लाएं सकारात्मक बदलाव

    डॉ. चिन्मय पण्ड्या (प्रतिकुलपति, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार)। सद्बुद्धि, ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री मां गायत्री का प्राकट्य दिवस गायत्री जयंती के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गायत्री के अवतरण का पावन दिवस माना गया है। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में मां गायत्री का विशेष स्थान है। उन्हें वेदमाता, ऋषियों की प्रेरणास्रोत तथा समस्त ज्ञान और चेतना की देवी माना गया है। गायत्री जयंती का पर्व मानव जीवन में आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों और सदाचार की स्थापना का संदेश देता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब संसार अज्ञानता, भ्रम और अधर्म के अंधकार में डूबने लगा, तब ज्ञान का प्रकाश फैलाने और मानवता को सही मार्ग दिखाने के लिए मां गायत्री का प्राकट्य हुआ। मां गायत्री चारों वेदों का सार और दिव्य ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके स्वरूप में ज्ञान, शक्ति और करुणा का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और निष्ठा के साथ मां गायत्री की साधना, आराधना करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और उसकी बुद्धि सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित होती है।

    गायत्री जयंती का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गायत्री महामंत्र है, जिसे भारतीय ऋषियों ने प्राणि मात्र के कल्याण का महामंत्र बताया है। ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो न: प्रचोदयात्। यह महामंत्र केवल शब्दों का समूह ही नहीं है, वरन चेतना को जाग्रत करने वाली दिव्य ऊर्जा का स्रोत है। इसका अर्थ है- उस प्राणस्वरूप, दुखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।

    वर्तमान समय में गायत्री जयंती की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। आज समाज भौतिक प्रगति के नए आयाम छू रहा है, लेकिन साथ ही नैतिक संकट, मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन और मूल्यहीनता जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी अनेक प्रकार के आकर्षणों और भ्रमों के बीच अपने जीवन की दिशा खोज रही है। ऐसे समय में मां गायत्री का संदेश युवाओं को विवेकपूर्ण निर्णय लेने, आत्मविश्वास विकसित करने और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा प्रदान करता है।

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    गायत्री जयंती हमें यह भी सिखाती है कि वास्तविक उन्नति केवल आर्थिक या भौतिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि चरित्र, संस्कार और आत्मिक विकास से होती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक नागरिक बनना भी है। मां गायत्री की उपासना मनुष्य के भीतर सेवा, करुणा, सहिष्णुता, अनुशासन और मानवता जैसे गुणों का विकास करती है। यही गुण एक स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं।

    गायत्री जयंती का पर्व हमें अपने विचारों को शुद्ध करने, जीवन में सकारात्मकता अपनाने और ज्ञान के प्रकाश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम मां गायत्री के आदर्शों को अपने व्यवहार और जीवन में भी उतारें। यही गायत्री जयंती का वास्तविक संदेश और सार्थक उत्सव है। मां गायत्री की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, विवेक, शांति और सद्भाव का प्रकाश फैले, यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी कामना है।

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