ज्यादा सोचने वालों के काम नहीं बनते: ईश्वर पर सरल श्रद्धा और एकाग्र विचार ही है सफलता की कुंजी
सद्गुरु बताते हैं कि सरल श्रद्धा और एकाग्र विचार ही इच्छाओं की पूर्ति का मार्ग है। अत्यधिक सोचने वाले लोग अपनी इच्छाओं को स्वयं बाधित करते हैं, जबकि अ ...और पढ़ें
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सद्गुरु: सरल श्रद्धा और एकाग्र विचार से पाएं जीवन में सफलता
सद्गुरु (प्रमुख, ईशा फाउंडेशन, आध्यात्मिक गुरु)। आपने शायद उन लोगों के बारे में सुना होगा जिन्होंने कुछ इच्छा की और वह आशा से भी अधिक सच हो गई। आम तौर पर, ऐसा उन लोगों के साथ होता है, जो श्रद्धावान हैं। मान लीजिए आप एक घर बनाना चाहते हैं। अगर आप सोचना शुरू करते हैं, ‘अरे, मुझे घर बनाने के लिए 50 लाख चाहिए, लेकिन मेरी जेब में मेरे पास सिर्फ 50 रुपये हैं, यह संभव नहीं है।’ जिस पल आप सोचते हैं, ‘संभव नहीं है,’ आप यह भी सोच रहे हैं, ‘मैं इसे नहीं चाहता।’
एक स्तर पर आप इच्छा पैदा कर रहे हैं कि आप कुछ चाहते हैं और दूसरे स्तर पर आप कह रहे हैं कि संभव नहीं है, यानी आप उसे नहीं चाहते। इस टकराव में, शायद यह घटित न हो। श्रद्धा सिर्फ उन लोगों के लिए काम करती है, जो सरल मन के हैं। यह उन लोगों के लिए कभी काम नहीं करती, जो बहुत ज्यादा सोचने वाले हैं। जो बहुत ज्यादा दिमाग चलाते हैं। एक बालसुलभ इंसान, जिसे अपने भगवान या अपने मंदिर में सरल श्रद्धा है, वह मंदिर जाता है और कहता है, ‘शिव जी! मैं घर चाहता हूं, मैं नहीं जानता कि कैसे, आपको उसे मेरे लिए बनवाना चाहिए।’ उसके मन में कोई नकारात्मक विचार नहीं हैं। अपार श्रद्धा से वो चीजें पूरी तरह से हट गई हैं।
अब उसे विश्वास है कि शिव उसके लिए वह करेंगे और वह हो जाएगा। क्या शिव आकर आपके लिए घर बनाने वाले हैं? नहीं। मैं चाहता हूं कि आप समझें कि भगवान आपके लिए अपनी छोटी अंगुली भी नहीं उठाएंगे। जिसे आप ईश्वर कहते हैं वह सृष्टि का स्रोत है। एक सृष्टिकर्ता के रूप में उन्होंने अद्भुत काम किया है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि जीवन वैसे घटित हो, जैसे आप सोचते हैं कि उसे होना चाहिए, तो आप कितनी एकाग्रता से सोचते हैं, आपका विचार कितना स्थिर है और विचार प्रक्रिया में कितना स्पंदन मौजूद है, यह तय करेगा कि आपका विचार वास्तविकता बनेगा या बस एक खोखला विचार ही बना रहेगा।
क्या संभव है और क्या संभव नहीं है, यह आपका मामला नहीं है, वह प्रकृति का काम है। इस पर आपको अधिक नहीं सोचना है। प्रकृति उसे तय करेगी। आप बस यह देखिए कि वह क्या है, जो आप वाकई चाहते हैं और उसके लिए प्रयास कीजिए। अगर आपका विचार एक शक्तिशाली तरीके से पैदा हुआ है, और विचार प्रक्रिया की तीव्रता को नीचे लाने वाले कोई नकारात्मक विचार नहीं हैं, तो वह जरूर साकार होगा।