मानसून वास्तु स्पेशल: तांबे के बर्तन का वो चमत्कारी उपाय, जो धो देगा बुरी नजर का असर
वर्षा की हर बूंद में छुपा है आपकी समृद्धि और मानसिक शांति का रहस्य। वास्तु विशेषज्ञ डा. जय मदान से जानिए कि कैसे इस मानसून प्रकृति के पावन जल और सही व ...और पढ़ें

मानसून वास्तु से जुड़े इन बातों का रखें खास ध्यान (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
वास्तु विशेषज्ञ डा. जय मदान। जैसे ही वर्षा ऋतु आती है, चारों तरफ एक नई जिंदगी, एक नई उमंग और हरियाली छा जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तु शास्त्र में इस मौसम को इतना खास क्यों माना गया है? मैं हमेशा कहती हूं कि इस मौसम में पूरी प्रकृति में हमारा जल तत्व सबसे ज्यादा सक्रिय और ताकतवर हो जाता है।
जल सिर्फ प्यास नहीं बुझाता, यह हमारी भावनाओं और ऊर्जा का आधार है। आकाश के रास्ते नीचे गिरता वर्षा का जल अपने साथ एक अद्भुत सकारात्मक शक्ति लेकर आता है। अगर आप इस शक्ति का सही इस्तेमाल करना सीख लें, तो घर के बड़े से बड़े वास्तु दोष को आप चुटकियों में दूर कर सकते हैं।
पवित्र वर्षा जल
मेरा यकीन मानिए, बारिश का पानी दुनिया के सबसे पवित्र जलों में से एक है। यह बात माडर्न साइंस भी मानती है। यह केवल सूखी धरती को नहीं सींचता, बल्कि आपके घर के पूरे आभामंडल को साफ कर देता है।
आपको करना बस इतना है कि जब अच्छी बारिश हो रही हो, तो एक साफ तांबे या कांच के बर्तन में इस पानी को इकट्ठा कर लें। फिर इसमें थोड़ा सा पवित्र गंगाजल मिला लें। इस पानी को अपने घर के मुख्य द्वार पर छिड़कें। आप खुद महसूस करेंगे कि घर में आने वाली हर नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर का असर खत्म हो गया है। जब आप इसे घर के सभी कमरों और कोनों में छिड़कते हैं, तो रुकी हुई और नकारात्मक ऊर्जा तुरंत सकारात्मकता में बदल जाती है।
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कोनों की सफाई
बरसात के दिनों में हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या आती है घर में सीलन, नमी और दीवारों पर आने वाले काले धब्बों की। वास्तु में सीलन को बहुत बड़ा दोष और दुर्भाग्य का सूचक माना गया है। घर के कोने और दीवारें आपकी चेतना और ऊर्जा के मुख्य केंद्र हैं।
अगर इन कोनों में सीलन या गंदगी जमा होती है, तो वहां नकारात्मक ऊर्जाएं अपना स्थान बना लेती हैं। इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर और जेब पर पड़ता है, बेवजह के खर्चे बढ़ने लगते हैं। इसलिए मेरी सलाह है कि थोड़ा प्रयास करके इस मौसम में घर के हर कोने को सूखा, साफ और महकता हुआ रखें।
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सही जल निकासी
वास्तु में दिशाओं का खेल बहुत निराला है, खासकर जब बात बहते हुए पानी की हो। आपकी छत, बालकनी या आंगन से बारिश का पानी किस दिशा में बहकर बाहर निकल रहा है, इसी से तय होता है कि आपके घर में पैसा टिकेगा या नहीं। हमेशा ध्यान रखें कि बारिश के पानी की निकासी सिर्फ और सिर्फ उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होनी चाहिए। ये दिशाएं कुबेर जी और देवताओं की मानी जाती हैं। जब पानी यहां से बहता है, तो घर में सुख-समृद्धि खिंची चली आती है। अगर पानी दक्षिण या पश्चिम से बाहर जा रहा है, तो यह धन की हानि और मानसिक तनाव का रास्ता बनाता है। पाइप या नाली से इसे मोड़ देना बहुत आसान है और लंबे समय में आपके लिए लाभदायक।
अद्भुत रेन मेडिटेशन
मैंने अपने एक वीडियो में रेन मेडिटेशन यानी वर्षा ध्यान को साझा किया है। आज हर दूसरा इंसान तनाव, अवसाद और दिमाग में चलने वाले फालतू के विचारों से परेशान है। इसका एक अचूक इलाज प्रकृति के पास है। जब तेज बारिश हो रही हो, तो कुछ देर के लिए बाहर निकलिए और उस बारिश में भीगिए। अपनी आंखें बंद कर लीजिए और यह महसूस कीजिए कि यह पानी सिर्फ आपकी त्वचा को नहीं छू रहा, बल्कि आपके दिमाग के सारे तनाव, पुरानी कड़वी यादों और मानसिक रुकावटों को अपने साथ बहाकर ले जा रहा है। यह आपके अवसाद को पूरी तरह धो देगा।
समृद्धि के उपाय
मैं हमेशा मानती हूं कि वर्षा ऋतु हमारे जीवन में एक नई शुरुआत का संदेश लेकर आती है। आसमान से बरसने वाला पानी कभी किसी में भेदभाव नहीं करता, वह सबको एक समान ऊर्जा देता है। इस पावन ऋतु में अपने घर के वास्तु दोषों को पूरी तरह खत्म करने के लिए रोज शाम को कपूर और गूगल का धुआं जरूर करें। इससे सीलन की बदबू भी जाएगी और कीटाणु भी मरेंगे। इस मानसून प्रकृति के इस अनमोल तत्व का सम्मान कीजिए, इन छोटे-छोटे वास्तु उपायों को अपनी जिंदगी में उतारिए और फिर देखिए कि कैसे आपका जीवन खुशियों, समृद्धि और सुकून से भर जाता है!
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।