पढ़ाई की टेबल से लेकर दीवारों के रंग तक: क्या वास्तु के हिसाब से सही है आपके बच्चे का कमरा?
बच्चों के स्टडी रूम का निर्माण, डिजाइन और दिशा वास्तु के अनुसार होना चाहिए, क्योंकि यह उनकी एकाग्रता और कार्यक्षमता पर गहरा प्रभाव डालता है। सही दिशा, ...और पढ़ें

वास्तु के हिसाब से बच्चों के स्टडी रूम से जुड़ी अहम जानकारी (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हममें से ज्यादातर लोग घर बनवाते समय दिशाओं और वास्तु का ध्यान तो देते हैं, लेकिन बात जब बच्चों के कमरों की आती है, तो अक्सर उसके निर्माण, डिजाइन, कलर और दिशाओं का नजर अंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की ऊर्जा का प्रभाव वहां रहने वाले प्रत्येक सदस्यों पड़ता है। ऐसे में बच्चों के स्टडी रूम को लेकर लापरवाही बरतना उनकी ऊर्जा और कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है।
वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, घर में बच्चों के पढ़ने का कक्ष बोरिंग होने से उनकी कार्यक्षमता और फोकस पर पड़ता है। अगर आप भी बच्चों के लिए स्टडी रूम बनाने की सोच रहे हैं, तो इन बातों को नजरअंदाज न करें।
पढ़ाई के लिए सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा में बैठकर पढ़ने से बच्चों की एकाग्रता में वृद्धि होती है, जो उनके उज्जवल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए बच्चों का रूम तैयार कराते समय सही दिशा मायने रखती है।
पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, बच्चों के अध्ययन के लिए पूर्व या उत्तर दिशा शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि करती है, तो वही उत्तर दिशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ ध्यान और सफलता दिलाती है।
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कमरे का सही रंग
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बच्चों के स्टडी रूम की दीवारों का रंग हमेशा ऐसा होना चाहिए, जो उन्हें सकारात्मक वातावरण और शांति प्रदान करें। इसके लिए निम्नलिखित रंगों का चयन कर सकते हैं।
सफेद रंग- यह रंग साफ-सफाई, मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
क्रीम रंग- शांति, संतुलन और पॉजिटिव एनर्जी के लिए जरूरी माना जाता है।
हल्का पीला- याद रखने और सीखने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।
हल्का हरा- यह रंग आंखों को आराम देने के साथ तनाव कम करने में और मन को शांत रखने में मदद करता है।
आसमानी- बच्चों के कमरे में आसमानी रंग मानसिक शांति, रचनात्मकता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
ध्यान देने वाली बातें
1. बच्चों के कमरे में बहुत गहरा या चटक रंगों का इस्तेमाल करने से बचें।
2. कमरे में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा के आने जाने के लिए पर्याप्त स्थान रखें।
3. बच्चों के कमरे को हमेशा साफ, व्यवस्थित और सुंदर बनाए रखें।
4. पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, कमरे में हल्का और शांत रंग बच्चे के मन को शांत करने के साथ उन्हें पढ़ाई के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

स्टडी रूम को व्यवस्थित रखें
बच्चों का स्टडी रूम हमेशा व्यवस्थित रखना चाहिए। यहां तक कि उनकी पढ़ाई की टेबल भी साफ और व्यवस्थित हो। ऐसा करने से बच्चों का ध्यान इधर-उधर की चीजों पर भटकता नहीं है।
बच्चों के स्टडी टेबल पर क्या रखें?
- बच्चों के स्टडी टेबल पर हमेशा जरूरत की किताबें और पढ़ाई से जुड़ी चीजें ही होनी चाहिए।
- पेन या पेंसिल के बॉक्स व्यवस्थित होने चाहिए।
- मोटिवेशनल कोट्स और चार्ट लगाना शुभ माना जाता है।
- छोटे-छोटे इनडोर प्लांट और प्राकृतिक से जुड़ी चीजें
- टेबल को रोजाना साफ-सुथरा रखना चाहिए।
बच्चों के स्टडी टेबल पर क्या नहीं रखें?
- बेवजह की किताबें और अनावश्यक कॉपियां
- टूटी हुए चीजें जैसे कि, घड़ी, खराब पेन, रद्दी कॉपियां
- सजावट से जुड़ी वस्तुएं
- खाने-पीने की चीजें या गंदगी या धूल युक्त कोई भी चीजें
बच्चों के स्टडी रूम में कैसी तस्वीरें लगाएं?
स्टडी रूम में सही तस्वीरें बच्चों के मन और मस्तिष्क को शांत और सकारात्मक बनाने में मदद करती है। ऐसे में मां सरस्वती की शांत तस्वीर, उगते हुए सूर्य या प्रेरणादायक विचारों की तस्वीरें लगाना शुभ माना जाता है।
इस बात का खास ध्यान रखें कि, बच्चों के कमरे में ऐसी कोई भी तस्वीर न हो, जो हिंसा, युद्ध, डरावने दृश्य या उदासी से भरी हो। ऐसी तस्वीरें बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव दिखाती है, जो गलत असर दिखा सकती है।
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