पांच लोगों को आजीवन कारावास और एक बरी: 2007 में हुए किशोरी अपहरण केस में एडीजे एससी-एसटी एक्ट कोर्ट का फैसला
अलीगढ़ में करीब दो दशक पुराने किशोरी अपहरण मामले में अदालत ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह घटना 2007 ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
अलीगढ़ में दो दशक पुराने अपहरण मामले में फैसला।
पांच दोषियों को आजीवन कारावास, 20 हजार अर्थदंड।
एक आरोपी साक्ष्य के अभाव में अदालत से बरी।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। करीब दो दशक पुराने किशोरी के अपहरण मामले में अदालत ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे (एससी-एसटी एक्ट) प्रतिभा सक्सेना की अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। एक आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया गया। अभियोजन के अनुसार विजयगढ़ क्षेत्र के एक व्यक्ति ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि 28 सितंबर 2007 को गांव की एक महिला अपने पांच साथियों के साथ उसके घर पहुंची। सभी पर हथियार दिखाकर पुराने मुकदमे में समझौता और गवाही बदलने का दबाव बनाने का आरोप था। विरोध होने पर आरोपितों ने घर में घुसकर 16 वर्षीय बेटी को जबरन अपने साथ ले गए।
सतीश पांडे को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर ऊषा, अमर सिंह, लेखराज, सुरेश व बाबूलाल को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सतीश पांडे को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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अभियोजन पक्ष का कहना है कि इससे पहले भी इसी किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन पीड़िता के न्यायालय में उपस्थित न होने और एक अहम गवाह के बयान बदलने के कारण आरोपित बरी हो गए थे। आरोप है कि उसी रंजिश में दोबारा वारदात को अंजाम दिया गया। आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।