शिवलिंग को पत्थर समझ लगाई थी खुरपे की धार, फिर हुआ था चमत्कार, शिवाला मंदिर में पूरी होती मुरादें
अमरोहा के हसनपुर स्थित प्राचीन झारखंड महादेव शिवाला मंदिर में 250 वर्षों से जलाभिषेक होता है, जहां स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग पर चमत्कारिक घटना के बाद मं ...और पढ़ें

हसनपुर स्थित शिवाला मंदिर। जागरण
HighLights
हसनपुर के झारखंड महादेव मंदिर में 250 साल से जलाभिषेक।
स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग पर हुई थी चमत्कारिक घटना।
श्रावण मास में लाखों भक्त कावड़ लेकर आते हैं।
जागरण संवाददाता, अमरोहा। हसनपुर के प्राचीन झारखंड महादेव शिवाला मंदिर में करीब 250 वर्ष से जलाभिषेक होता चला आ रहा है। यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए थे। इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा अर्चना करने पर कई भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने की मिसाल सुनने को मिलती हैं।
बुजुर्गों का कहना है कि मंदिर के स्थान पर किसी जमाने में झुंड झाड़ हुआ करते थे। जहां एक घसेरे को घास छीलते हुए शिवलिंग दिखाई दिए थे। दिन में घसेरे ने पत्थर समझ कर शिवलिंग पर अपने खुरपे को धार लगाई थी, लेकिन रात को सपने में उन्हें बताया गया कि जिस पत्थर पर तुमने खुरपे को धार लगाई है, वह साधारण पत्थर नहीं बल्कि शिवलिंग हैं।
दिन निकलने पर उन्होंने अपने सपने को लोगों को साझा किया। लोगों ने झाड़ियों में पहुंच कर देखा तो वास्तव में वहां शिवलिंग दिखाई दे रहे थे। उसी दिन शिवलिंग के स्थान पर लोगों ने मंदिर स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू कर दी। इस मंदिर का नाम झारखंड महादेव शिवाला मंदिर रखा गया था।
हरिद्वार और बृजघाट से कावड़ लाते हैं भक्त
तहसील क्षेत्र में यह सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। सच्चे मन से यहां मांगी गई मुराद पूरी होने की कई मिसालें हैं। श्रावण और फाल्गुन माह में झारखंड महादेव शिवाला मंदिर पर लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और बृजघाट से कावड़ लाकर यहां पर जलाभिषेक करते हैं।
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श्रावण माह शुरू होते ही मंदिर पर कावड़ लेकर आने वाले शिव भक्त पहुंचने शुरू हो गए हैं और बोल भोले की बम एवं जय भोले के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो रहा है।
यह बोले भक्त
हसनपुर के झारखंड महादेव शिवाला मंदिर में करीब 250 वर्ष से जलाभिषेक होता चला आ रहा है। इस मंदिर की हसनपुर तहसील क्षेत्र के भक्तों में बड़ी मानता है दूर-दूर से भक्त यहां पूजा करने आते हैं।
-सतीश अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य।
नगर के झारखंड महादेव शिवाला मंदिर का गौरवमयी इतिहास रहा है। यहां आकर सच्चे मन से पूजा अर्चना करने के बाद भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने की अनेकों मिसाल बुजुर्गों के द्वारा सुनने को मिलती हैं। यह एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है।
-कालू उर्फ राकेश बंसल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हसनपुर।
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