राम मंदिर ट्रस्ट में होने वाला है बड़ा बदलाव? संतों की पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी ने बढ़ा दी हलचल
भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन भेजकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सभी वर्गों, विशेषकर वनवासी समाज को प्रतिनिधित्व ...और पढ़ें

राम मंदिर।

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जागरण संवाददाता, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सभी वर्गों, विशेषकर वनवासी समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग को लेकर भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन भेजा है।
संगठन ने ट्रस्टियों, पुजारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति में व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन पूरे हिंदू समाज के सामूहिक संघर्ष, आस्था और बलिदान का परिणाम है, इसलिए मंदिर की व्यवस्थाओं में भी उसी भावना का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
न्यास के अध्यक्ष राजर्षि रामनयनदास रामायणी ने कहा कि भगवान श्रीराम संपूर्ण समाज के आराध्य हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट की संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी वर्ग स्वयं को सम्मानपूर्वक प्रतिनिधित्व करता हुआ महसूस करे।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में साधक संतों को स्थान मिले तथा पुजारियों की नियुक्ति जाति-पांत के भेदभाव से ऊपर उठकर की जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि भगवान श्रीराम के वनवास काल में वनवासी समाज का योगदान भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अध्याय है। इसलिए उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना सामाजिक समरसता और श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप होगा।
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करतलिया आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इसलिए ट्रस्ट, पुजारियों और कर्मचारियों के चयन में सभी समाजों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अयोध्या के संतों का प्रतिनिधित्व हो। सभी शंकराचार्य, जगद्गुरु सम्मिलित हों, एक पक्ष के वर्ग के लोगों को ना रखा जाए सभी समाज के संतों का प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है। रावत मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बालकदास ने कहा कि श्रीराम का जीवन समानता और समरसता का संदेश देता है।