बुंदेलखंड में दोहरी रेल लाइन परियोजना से बदल रही विकास की तस्वीर, परियोजना से छह जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
बुंदेलखंड में झांसी-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन दोहरी रेल लाइन परियोजना से छह जिलों को सीधा लाभ मिल रहा है। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, यात्रा सुगम हो ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
4,329 करोड़ की परियोजना से छह जिलों को सीधा लाभ।
ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, आउटर पर रुकने का समय कम होगा।
कानपुर-झांसी के लिए मजबूत वैकल्पिक रेल मार्ग मिलेगा।
प्रवीण कुमार, बांदा। बुंदेलखंड में वर्षों से इंतजार की जा रही दोहरी रेल लाइन अब धीरे-धीरे जमीन पर उतर रही है। झांसी-मानिकपुर व खैरार-भीमसेन रेल दोहरीकरण परियोजना के कई हिस्सों पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। पूरी परियोजना तैयार होने के बाद न सिर्फ ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि बुंदेलखंड के विकास को भी नई गति मिलेगी।
झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और कानपुर जैसे छह जिले सीधे इसका लाभ उठाएंगे। वर्ष 2018 में स्वीकृत 4,329 करोड़ रुपये की इस परियोजना की कुल लंबाई 431 किलोमीटर है।
रेलवे ने इसे 26 निर्माण खंडों में बांटा है। इनमें महोबा की 3.06 किलोमीटर और खैरार की 16.86 किलोमीटर लंबी कार्ड लाइन भी शामिल है।
कार्ड लाइन ऐसी संपर्क रेल लाइन होती है, जिससे ट्रेनों को स्टेशन पर दिशा बदलने की जरूरत नहीं पड़ती और उनका संचालन तेज व आसान हो जाता है। दोनों कार्ड लाइनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अब तक परियोजना के 177.503 किलोमीटर हिस्से पर दोहरी रेल लाइन तैयार होकर चालू हो चुकी है।
झांसी-मानिकपुर रेलखंड में करीब 122.628 किलोमीटर व खैरार-भीमसेन रेलखंड में 58.823 किलोमीटर पर ट्रेनें दौड़ रही हैं। गुरुवार को मऊरानीपुर-रोरा के बीच 9.58 किलोमीटर लंबे नए दोहरीकृत सेक्शन पर भी ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया।
ट्रेनों की लेटलतीफी होगी कम
अभी एक ही लाइन होने के कारण कई जगह ट्रेनों को एक-दूसरे के गुजरने का इंतजार करना पड़ता है। दोहरी लाइन बनने के बाद अप और डाउन ट्रेनों का संचालन अलग-अलग लाइन पर होगा। इससे क्रासिंग में लगने वाला समय कम होगा, ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और समय से संचालन आसान होगा। यात्रियों को भी कम इंतजार करना पड़ेगा।
मालगाड़ियों का संचालन भी तेज होगा
बुंदेलखंड से बड़ी मात्रा में पत्थर, गिट्टी, दाल, तिलहन और अन्य कृषि उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। दोहरी रेल लाइन बनने से मालगाड़ियों का संचालन तेज होगा। उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलेगा और स्थानीय उत्पाद कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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कानपुर व झांसी की यात्रा भी होगी आसान
खैरार-भीमसेन रेलखंड पूरा होने के बाद बांदा, हमीरपुर और कानपुर के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। वहीं झांसी-मानिकपुर रेलखंड के पूरा होने से चित्रकूट, प्रयागराज और मध्य भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों का संचालन भी अधिक सुगम होगा। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावना भी बढ़ेगी।
कानपुर-झांसी के बीच मिलेगा मजबूत वैकल्पिक रेल मार्ग
खैरार-भीमसेन रेलखंड का दोहरीकरण पूरा होने के बाद कानपुर और झांसी के बीच रेलवे को एक मजबूत वैकल्पिक परिचालन मार्ग मिलेगा।
अभी कानपुर से उरई होते हुए झांसी जाने वाला रेल मार्ग उत्तर मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां से लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और बिहार की ओर से मुंबई, भोपाल, पुणे तथा दक्षिण भारत जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनें गुजरती हैं। इस मार्ग पर किसी तकनीकी खराबी, दुर्घटना, रखरखाव कार्य या अधिक दबाव की स्थिति में ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है।
ऐसी परिस्थितियों में भीमसेन-खैरार-बांदा-महोबा-झांसी दोहरी रेल लाइन रेलवे के लिए प्रभावी वैकल्पिक कारिडोर का काम करेगी। इससे आवश्यकता पड़ने पर ट्रेनों को इस मार्ग से संचालित करना आसान होगा।
साथ ही सामान्य दिनों में भी दोनों मार्गों पर परिचालन का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी, मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी और पूरे उत्तर मध्य रेलवे नेटवर्क की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बाढ़ से प्रभावित हुई निर्माण की रफ्तार
रेलवे निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार केन, बेतवा और यमुना जैसी बड़ी नदियों पर पुलों का निर्माण बाढ़ के दौरान प्रभावित हुआ। इसी वजह से परियोजना तय समय में पूरी नहीं हो सकी। अब लक्ष्य वर्ष 2027 के अंत तक शेष कार्य पूरा करने का रखा गया है।
दोहरी रेल लाइन बनने से ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। इससे अधिक संख्या में ट्रेनों को चलाना संभव होगा और ट्रेनों को आउटर पर खड़ा रखने की स्थिति कम होगी। परिचालन सुचारु होने से समय पालन में भी सुधार आएगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
-डाॅ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे-प्रयागराज
परियोजना के प्रमुख तथ्य- एक नजर में:
- परियोजना: झांसी-मानिकपुर एवं खैरार-भीमसेन रेल दोहरीकरण
- कुल लागत: 4,329 करोड़ रुपये
- कुल लंबाई: 431 किलोमीटर
- स्वीकृति वर्ष: 2018
- निर्माण खंड: 26
अब तक चालू हुए प्रमुख दोहरीकृत रेल सेक्शन
झांसी से चित्रकूट जिले में स्थित मानिकपुर रेलखंड
| खंड | दूरी | तिथि |
| बरुआसागर-टेहरका (निवाड़ी, मध्य प्रदेश) | 22.026 किमी | 13 जून 2025 |
| टेहरका-मऊरानीपुर (निवाड़ी, मध्य प्रदेश/झांसी) | 21.187 किमी | 30 जून 2024 |
| मऊरानीपुर-रोरा (झांसी/महोबा) | 9.58 किमी | 30 जुलाई 2026 |
| बेलाताल-कुलपहाड़ (महोबा) | 9.075 किमी | 31 मार्च 2025 |
| कुलपहाड़-महोबा (महोबा) | 21.582 किमी | 9 जून 2024 |
| बांदा-खुरहंड (बांदा) | 19.177 किमी | 11 दिसंबर 2025 |
| खुरहंड-बदौसा (बांदा) | 20 किमी | 23 जुलाई 2026 |
बांदा के खैरार से कानपुर के भीमसेन रेलखंड में
| खंड | दूरी | तिथि |
| रागौल-यमुना साउथ बैंक (हमीरपुर) | 28.633 किमी | 17 जुलाई 2024 |
| रागौल-अकोना (हमीरपुर/बांदा) | 12.50 किमी | 19 जुलाई 2025 |
| खैरार-अकोना (बांदा) | 17.69 किमी | 20 जून 2026 |
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