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    तीन दिन से किसी को मारा नहीं तो नींद नहीं आई... किराना व्यापारी की हत्या का बरेली पुलिस ने किया खुलासा

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 02:49 PM (IST)

    बरेली में मॉर्निंग वॉक पर निकले किराना व्यापारी सियाराम श्रीवास्तव की हत्या नशेड़ी अरमान ने की थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से अरमान और साक्ष्य ...और पढ़ें

    पुलिस की गिरफ्त में सियाराम की हत्या के आरोपित।

    पुलिस की गिरफ्त में सियाराम की हत्या के आरोपित।

    HighLights

    1. नशेड़ी अरमान ने की किराना व्यापारी की हत्या।

    2. ओमनी वैन से टक्कर मारकर चाकू से गला रेता।

    3. पिता इम्तियाज साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार।

    जागरण संवाददाता, बरेली। मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग किराना व्यापारी की हत्या नशेड़ी अरमान ने की थी। उसने व्यापारी को पहले ओमनी वैन से टक्कर मारकर गिराया और फिर बकरा काटने वाले चाकू से गला रेत दिया। पूछताछ में उसने बताया कि व्यापारी को वह नहीं जानता था। उन्हें मारने से पहले उसने दो और लोगों का पीछा किया था मगर वह बच निकले थे।

    आरोपित ने कहा कि उसने किसी को मारा नहीं इसलिए तीन दिनों से उसे नींद नहीं आ रही थी। पुलिस की पूछताछ से स्पष्ट हुआ कि आरोपित नशे का आदि है। व्यापारी की हत्या के बाद उनकी जेब में रखे 1200 रुपये लेकर भाग गया था। पुलिस ने अरमान को हत्या व उसके पिता इम्तियाज को साक्ष्य छिपाने के आरोप में जेल भेज दिया है।  

    व्यापारी को मारने से पहले दो और लोगों का किया था पीछा, मगर वह बच निकले

    भोजीपुरा के धौराटांडा निवासी सियाराम श्रीवास्तव 24 जुलाई की सुबह करीब छह बजे घर से टहलने के लिए निकले थे। कुछ देर बाद कस्बे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर धौराटांडा-बीबियापुर रोड पर उनका शव पड़ा मिला। उनके शरीर पर चाकू से गोदने के निशान थे और गला भी धारदार हथियार से रेता गया था। पुलिस ने मृतक के बेटे सुरेश के शिकायती पत्र पर तीन पड़ोसियों लालाराम, संजीव और महेंद्र श्रीवास्तव के विरुद्ध हत्या की प्राथमिकी पंजीकृत कर ली।

    पुलिस ने चेक किए सीसीटीवी

    पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि, हत्या में उन तीनों का हाथ नहीं हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि, उसमें एक कार उनका पीछा कर रही थी। कार के माध्यम से पुलिस धौराटांडा निवासी मो. अरमान तक पहुंची। पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने पूरी कहानी बता दी। कहा कि वह नशे का आदि है। वह व्यापारी को नहीं जानता था। जिस कार से उसने व्यापारी को टक्कर मारी वह उसके पिता इम्तियाज के नाम पर पंजीकृत है।

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    किसी व्यक्ति को नहीं मारा इसलिए तीन दिन से सोया नहीं, कार से खुल गई पोल

    पूछताछ में आरोपित अरमान ने बताया कि वह 24 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे कार लेकर घर से निकला। धौराटांडा से बिबियापुर रोड पर उसने कई चक्कर लगाए। वहां उसे एक बुजुर्ग टहलते हुए दिखाई दिया। इसके बाद कुछ दूर उसका पीछा किया और बाद में टक्कर मारकर गिराया और बाद में कार में रखे चाकू से उसका गला काट दिया। मृतक की जेब में रखे 1200 रुपये लेकर फरार हो गया।

    आरोपित ने बताया कि यह बात उसने अपने पिता इम्तियाज को बताई तो उन्होंने कार और हत्या में प्रयुक्त चाकू आदि को भी छिपा दिया। पुलिस ने पिता को साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया और दोनों को जेल भेज दिया।

    कैसे खुला पूरा केस... आसान भाषा में समझिए

    एसएसपी अनुराग आर्य ने इस घटना के राजफाश के लिए थाना पुलिस के अलावा एसओजी, सर्विलांस की टीम भी लगाई थीं। टीमों ने सबसे पहले सीसीटीवी फुटेज देखना शुरू किया। कई सीसीटीवी फुटेज में सियाराम टहलते हुए दिखाई दिए। पुलिस ने गौर किया तो पता चला कि एक ओमनी वैन उनके पीछे लगातार चल रही थी।

    सीसीटीवी फुटेज में उस वैन का पीछा किया। लौटते वक्त उस वैन का शीशा टूटा हुआ था, जिससे पुलिस को यह समझ में आ गया कि उसी वैन से टक्कर मारी गई थी। सीसीटीवी में वैन का नंबर स्पष्ट नहीं था। ऐसे में उसे ट्रेस करना काफी मुश्किल हो रहा था।

    इम्तियाज और उसके बेटे को किया अरेस्ट

    इसी बीच पुलिस को वैन के साइड के शीशे पर एक स्टार बना हुआ दिखाई दिया। उसी की मदद से पुलिस ने आस-पास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि यह वैन इम्तियाज की है। इसके बाद पुलिस ने इम्तियाज और उसके बेटे अरमान को गिरफ्तार किया।

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    हमदर्द राइस मिल में छिपा दी थी कार

    पूछताछ में आरोपित पिता पुत्र ने बताया कि घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए उन्होंने कार को हमदर्द राइस मिल में छिपा दिया था। ताकि, कोई उसे पकड़ न पाए। अब जब लगा कि पुलिस उन्हें पकड़ सकती है इसलिए वह उस कार को राइस मिल से निकालकर हल्द्वानी की तरफ छिपाने की तैयारी में थे। मगर उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

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    पुलिस की सूझबूझ से तीन बेगुनाह जेल जाने से बचे

    पुलिस की सूझबूझ से इस बार तीन बेगुनाह हत्या के आरोप में जेल जाने से बच गए। स्वजन ने शक के आधार पर तीन पड़ोसियों के नाम लिखाए थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की भी की थी मगर जब लगा कि घटना में उनका कोई हाथ नहीं है। तो पुलिस ने आगे की जांच शुरू की। पुलिस ने बेगुनाहों को जेल नहीं भेजा और हत्या करने वाले असली आरोपित को गिरफ्तार किया गया।

    इस घटनाक्रम के राजफाश में एसओजी प्रथम की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हत्यारोपित की तलाश में एसओजी प्रथम प्रभारी सुनील शर्मा के साथ उनकी टीम के सदस्य एसआई नवीन, हेड कांस्टेबल राहुल, संजय आदि ने सीसीटीवी फुटेज से महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित कर हत्यारोपित को गिरफ्तार किया।

    पिता ने बेटे को बचाने के लिए बताया मानसिक बीमार

    बेटे को हत्या के आरोप से बचाने के लिए पिता ने उसे मानसिक रूप से बीमार बता दिया। कहा कि उसका उपचार किया जा रहा है। हालांकि, आरोपित नशे का आदी है। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है।

    सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक संदिग्ध वैन सियाराम का पीछा करते दिखाई दे रही थी। उसी के आधार पर जांच की तो अरमान तक पहुंचे। पता चल कि वह नशे का आदी है। उससे पूछताछ की गई तो उसने पूरा घटनाक्रम स्वीकार लिया। साथ ही उसने यह भी बताया कि इस घटना को छिपाने में उसके पिता ने मदद की थी। दोनों को जेल भेज दिया गया है।

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    मुकेश मिश्र, एसपी नार्थ।