Chitrakoot Flood Ground Report: Nepal के बाद चित्रकूट में बाढ़ से हाहाकार... मंदाकिनी ने बताई हद, जहां बाधा, वहीं दिखा रौद्र रूप
Chitrakoot Flood Ground Report: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने 23 साल बाद रौद्र रूप दिखाया, जिससे भारी तबाही हुई और ...और पढ़ें

मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र के रजौला चौराहा से हनुमान धारा होकर कर्वी को जोड़ने वाले मोहकमगढ़ के पास बने पुल से मंदाकिनी की बाईं ओर दिख रहे निर्माण व नदी की धारा। धीरज गुप्ता
HighLights
मंदाकिनी नदी ने 23 साल बाद चित्रकूट में रौद्र रूप दिखाया
नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण से बाढ़ की भयावहता बढ़ी
चित्रकूट में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त, बचाव और राहत कार्य जारी
जागरण टीम, चित्रकूट। Chitrakoot Flood Ground Report: प्रभु श्री राम के साढ़े 11 साल के वनवास काल की गवाह पतित पावन मंदाकिनी ने 23 साल बाद रौद्र रूप दिखाया तो हालात बदले-बदले हैं। तपोभूमि में गिनती के श्रद्धालु दिख रहे। मठ-मंदिरों, होटल-धर्मशालाओं में कीचड़ भरा है। दुकानों के शटर खुले हैं, लेकिन दुकानदारों के चेहरे बुझे हैं। कारण, पर्यटक-श्रद्धालु बढ़े तो कमाई के चक्कर में नदी तट पर कब्जे, मानकों की अनदेखी की गई।
दुर्दशा के जिम्मेदार सिंचाई विभाग और प्रशासन भले कहें कि वे बहाव क्षेत्र को निर्बाध कर रहे हैं, पर तट से दोनों ओर 150-150 मीटर तक निर्माण न होने का नियम हर कदम टूटा दिखता है। इस संकट के पीछे के कारण 'दैनिक जागरण' चार दिवसीय समाचारीय श्रंखला के माध्यम से बताएगा। पहली कड़ी में चित्रकूट से मुख्य संवाददाता शिवा अवस्थी बता रहे हैं, उद्गम स्थल सती अनुसुइया आश्रम से राघव प्रयाग घाट तक की कहानी।
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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी का दायरा 300 वर्ग किमी है। नदी 29 अगस्त को उफनाई तो समुद्र तल से 126.500 मीटर ऊंचाई पर बने खतरे के निशान से लगभग साढ़े आठ मीटर ऊपर 135.200 मीटर तक पहुंच गई। सती अनुसुइया आश्रम स्थित उद्गम स्थल से यमुना-मंदाकिनी मिलन स्थल तक 66 किमी के बहाव क्षेत्र में जहां प्रवाह में बाधाएं थीं, वहीं सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
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नदी के रास्ते को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला-उद्गम स्थल मप्र के सती अनुसुइया आश्रम से सतना के रजौला बाईपास होकर राघव प्रयाग घाट तक 14 किमी। दूसरा- राघव प्रयाग घाट से रामघाट और कर्वी के रास्ते बंधोइन बंधे तक 14 किमी। तीसरा-बंधोइन से कनकोटा गांव के पास यमुना में समाहित होने तक 38 किमी। सती अनुसुइया आश्रम से यमुना तक की सीधी दूरी 55 किमी है।
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मंगलवार को रामघाट क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ जाने के बाद आधी से ज्यादा डूबी दुकानें। जागरण
सती अनुसुइया आश्रम से रजौला तक 10 किमी के दायरे में बीच के पेड़ तो उखड़ गए, लेकिन किनारे तेज प्रवाह को बेधड़क झेल गए। रजौला से राघव प्रयाग घाट तक चार किमी दूरी में बाईं ओर आश्रम, होटल और गेस्ट हाउस हैं। इसी क्षेत्र में दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआइ) परिसर, आरोग्य धाम, सियाराम कुटीर, पंचवटी, तुलसी पीठ, पंजाबी भगवान आश्रम वह जानकी कुंड क्षेत्र में स्थित मठ-मंदिर, घर-दुकानें हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा बर्बादी यहीं दिख रही। कारण, इसी क्षेत्र में कामदगिरि से निकली पयस्वनी व सरयू धाराओं के आसपास कब्जे हैं।
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मंगलवार को रामघाट क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ जाने के बाद आधी से ज्यादा डूबी दुकानें। जागरण
मंदाकिनी की धारा सिकुड़ गई है। पानी बढ़ा तो जिस ओर रास्ता मिला, उसी ओर बह चला। सर्वोदय कार्यकर्ता अभिमन्यु भाई कहते हैं कि मनमानी न रुकी तो ऐसी विभीषिका आगे भी दिखेगी। महांत रामजन्मदास तो कहते हैं कि ज्यादा कमाई के चक्कर में अनदेखी हो रही और अब चित्रकूट सूना है। मंदाकिनी, सरयू-पयस्वनी की धारा से कब्जे हटाने होंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव रविवार को बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे तो अतिक्रमण की बात स्वीकारते हुए जांच के लिए कहा है।
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मंगलवार को रामघाट क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ जाने के बाद भरा बाढ़ का पानी। धीरज गुप्ता
पुराने निर्माण हैं। नदियों की धाराओं पर अनाधिकृत कब्जों को लेकर चिह्नांकन करके सतत निगरानी की जा रही है। सीमांकन कराने पर भी काम होगा।
एसके प्रसाद, अधिशासी अभियंता, सिंचाई प्रखंड कर्वी।
मंदाकिनी सहित कई नदियों में फिर उफान
29 अगस्त की बाढ़ के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यूपी-एमपी के बड़े हिस्से को जलमग्न कर दिया। मंदाकिनी समेत कई नदियों के उफान और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण धर्मनगरी के 84 कोस क्षेत्र में मंगलवार को चारों ओर पानी ही पानी नजर आया।
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चित्रकूट के कर्वी स्थित पुल घाट पर शाम को उफनाई मंदाकिनी के दृश्य में डूबे नजर आते मंदिर। जागरण
महज साढ़े तीन घंटे में 3.10 मीटर की बढ़ोतरी
मंदाकिनी ने फिर रौद्र रूप धारण कर लिया। तड़के चार बजे से जलस्तर तेजी से बढ़ा और साढ़े सात बजे तक महज साढ़े तीन घंटे में 3.10 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे पानी 131.050 मीटर पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 126.500 मीटर से 4.550 मीटर ऊपर था। हालांकि रिकार्ड बाढ़ 135.200 से यह 4.180 मीटर नीचे थी।
रामघाट, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग और बस्तियों में भरा पानी
रामघाट की दुकानें, टेंपो स्टैंड, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग और नदी किनारे की बस्तियों में पानी भरा है। फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया गया। रामघाट और तरौंहा से 100 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। रैन बसेरा और टाउन हाल में बनाए गए राहत शिविरों में 63 लोग शरण लिए हुए हैं।
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नांव में बैठकर यमुना तटवर्ती गावों में निगरानी करते व माइक के जरिए ग्रामीणों को जागरूक करती सजेती पुलिस। जागरण
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
रामघाट और निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन की टीमें लाउडस्पीकर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील करती रहीं। डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि आपदा प्रबंधन के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित पीएसी की 10 टीमें लगाई गई हैं। कंट्रोल रूम भी सक्रिय है।
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मध्यप्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र के रजौला चौराहा से हनुमान धारा होकर कर्वी जोड़ने वाले मोहकमगढ़ के पास बने पुल से सती अनसुइया आश्रम की ओर से आ रही नदी के दोनों किनारे पर नजर आता जंगल। धीरज गुप्ता
गांवों में पानी भरने से गिर रहे घर, 100 से अधिक बचाए गए
लगातार बारिश से बरुआ, ओहन, गुंता और रसिन बांध लबालब हो गए। जिनके फाटक खोलने से करीब 24 गांवों के निचले इलाके में पानी भर गया है। बारिश और बाढ़ ने जिले में अब तक करीब 475 घरों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त किया है, जबकि 50 से अधिक मकान गिर गए हैं। रपटे डूब गए हैं, जिससे आवागमन बाधित है।
चित्रकूट-सतना मार्ग भी प्रभावित
मानिकपुर-सतना मार्ग पर कारी बराह रपटा दोबारा तेज बहाव में बह गया। चित्रकूट-सतना मार्ग भी प्रभावित है। तेज बहाव के कारण पहले बह चुके मार्ग को दोबारा चालू करने की कोशिश के बाद फिर पानी बढ़ने से आवागमन बाधित हो गया। बूढ़ा सेमरवार गांव के नाले में हाथ पैर धोते समय पैर फिसलने से 14 वर्षीय मीनू यादव पानी में बह गई।
इधर, गंगा-यमुना का जलस्तर घटा, पर जनजीवन प्रभावित
फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर घटकर 136.65 मीटर रहा, जबकि रामगंगा 10 सेंटीमीटर बढ़ी। बाढ़ग्रस्त गांवों में कीचड़, बीमारी और पशुचारे की समस्या बनी है। फतेहपुर में गंगा-यमुना का जलस्तर घटा, जबकि बांदा में केन व यमुना में कमी के बावजूद सात रपटे डूबे हैं। उन्नाव में हजारों बीघा फसल जलमग्न है। कानपुर देहात में कच्चा मकान गिरने से सात माह की बच्ची की मौत हो गई।
