Chitrakoot Floods: कभी श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाले चित्रकूट में दहशत, बाढ़ में बह गई पर्यटन की रौनक
Chitrakoot Floods: मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से चित्रकूट की पर्यटन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। रामघाट सहित ...और पढ़ें
-1788275417541_m.webp)
मंदाकिनी तट पर क्षतिग्रस्त घर व मंदिर में नुकसान देखते लोग। जागरण
HighLights
मंदाकिनी बाढ़ से चित्रकूट की पर्यटन व्यवस्था ध्वस्त।
रामघाट, हनुमानधारा पुल सहित कई स्थल क्षतिग्रस्त।
व्यापारियों, नाविकों को करोड़ों का भारी नुकसान।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। Chitrakoot Floods: मंदाकिनी की बाढ़ ने धर्मनगरी की पर्यटन व्यवस्था की रौनक बहा ले गई। कभी श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार रहने वाले रामघाट से लेकर गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया, हनुमानधारा और स्फटिक शिला तक सन्नाटा पसरा है। हनुमानधारा का पुल बहने, कई मार्ग बंद होने और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रवेश प्रतिबंधित होने से चित्रकूट आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। सामान्य दिनों में करीब 60 हजार श्रद्धालु-सैलानी प्रतिदिन तपोभूमि पहुंचते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में 10 प्रतिशत भी नहीं पहुंच रहे हैं।
-1788275543580.webp)
चित्रकूट मंदाकिनी में आयी बाढ़ की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हुए घाट। जागरण
बाढ़ में रामघाट तो उजाड़ हो गया है
घाट की शान रहा तुलसी मंदिर बह गया और तुलसीदास की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई है। करोड़ रुपये का बना फुट ओवर ब्रिज की टिने बह गईं हैं। घाट के आसपास की 400 से अधिक दुकानें बाढ़ की चपेट में आने से व्यापारियों की मुश्किल बढ़ गई है। दुकानों में रखा प्रसाद, पूजा सामग्री, फूल-माला, कपड़े और खान-पान का सामान पानी और गाद से खराब हो गया।
रामघाट से गुप्त गोदावरी तक सन्नाटा
पानी उतरने के बाद व्यापारी कारोबार शुरू करने के बजाय दुकान से कीचड़ और मलबा निकालने में जुटे हैं। मंदाकिनी में सामान्य दिनों में करीब 300 नावों से नौका विहार होता है। बाढ़ के बाद नौका संचालन बंद है। इससे नाविकों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पर्यटकों की आमद घटने का असर होटल और धर्मशालाओं पर भी पड़ा है। रामघाट क्षेत्र में प्रशासन की पर्यटन सूची में 16 आवासीय प्रतिष्ठान दर्ज हैं।
तपोभूमि में रोजाना करीब 10 करोड़ के कारोबार पर संकट
होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक सामान्य दिनों में पर्यटन से पूरे क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता था। बाढ़ के बाद कारोबार लगभग ठप है। दुकानों और प्रतिष्ठानों में हुए नुकसान की भरपाई में महीनों लग सकते हैं। कामदगिरि प्रमुख द्वार पर प्रसाद की दुकान चलाने वाले अमित कुमार कहते हैं कि त्योहारों को देखते हुए दुकानों में सामान भरा था, लेकिन बाढ़ ने पूरी तैयारी चौपट कर दी। अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि पर्यटन कब सामान्य होगा।
