Chitrakoot Flood Ground Report: नदी के 150-150 मीटर क्षेत्र में भी कर दी 'रजिस्ट्री', फिर मंदाकिनी ने बिगाड़ दिया 'नक्शा'
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ का मुख्य कारण नदी के बफर जोन और डूब क्षेत्र में हुए ...और पढ़ें

मंदाकिनी की बाढ़ में डूबा रामघाट। जागरण
HighLights
मंदाकिनी के बफर जोन में 5000 से अधिक अवैध निर्माण
अतिक्रमणों के कारण रामघाट क्षेत्र में भीषण बाढ़ से तबाही
जिलाधिकारी ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई का दिया आश्वासन
शिवा अवस्थी, कानपुर। राघव प्रयाग घाट के आगे बढ़ने पर रामघाट तक मंदाकिनी का दायरा सिकुड़ जाता है। यहीं पयस्वनी और सरयू आकर मिलती हैं, जिससे बारिश के दौरान मंदाकिनी में पानी बढ़ जाता है। इसे बहने के लिए ज्यादा स्थान चाहिए, लेकिन हालात इससे उलट हैं। नदी के बफर जोन यानी दोनों ओर 150-150 मीटर क्षेत्र में इतने निर्माण हो गए हैं कि जलप्रवाह बाधित होता है। इसका नतीजा यह हुआ कि 29 अगस्त को आई बाढ़ ने रामघाट क्षेत्र का नक्शा बिगाड़ दिया।
नदी के रास्ते को तीन हिस्सों में बांटकर देखा जाए तो मप्र के सती अनुसुइया आश्रम स्थित उद्गम स्थल से राघव प्रयाग घाट तक 14 किमी के क्षेत्र में जितने क्षेत्र में निर्माण नहीं हैं, वहां नुकसान कम हुआ है। राघव प्रयाग घाट से बंधोइन तक 14 किमी की दूरी में बीच में आने वाले रामघाट और आसपास के इलाके में 5000 से ज्यादा अवैध निर्माण हैं। हालत यह है कि नदी के डूब क्षेत्र तक अतिक्रमण हो चुका है। नक्शे पास हो गए, रजिस्ट्री हो गई पर कैसे, ये सवाल अनुत्तरित हैं।
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जिम्मेदार सिंचाई विभाग और प्रशासन आंखे मूदे हैं और नतीजा यह निकला कि इस बार की बाढ़ में यहीं सबसे ज्यादा बर्बादी भी हुई है। लगभग 700 साल पहले बने महाराजाधिराज स्वामी मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर, निर्मोही अखाड़ा, भरत मंदिर, चरखारी मंदिर, ब्रह्मपुरी, पर्णकुटी, तुलसी गुफा 1994, 2003 व 2026 की भीषण बाढ़ झेल गए, क्योंकि नदी तट की ओर किए गए मजबूत उपाय इन्हें मंदाकिनी के वेग से बचाते हैं।
इनकी आड़ में तने होटल, दुकानें व घर समेत पूरे घाट पर गलत तरीके से किया गया पर्यटन विकास तबाह हो चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता आनंद सिंह पटेल कहते हैं कि रामघाट व आसपास का तीर्थ क्षेत्र 70 साल पहले तपस्थली था। बस मठ-मंदिर, धर्मशालाएं और श्रद्धालु थे। अब यह व्यापारिक केंद्र बन गया है।
पूरे तीर्थ क्षेत्र में इमारतें तन गई हैं, जो नदी की राह रोकती हैं। नदी सफाई व जल संरक्षण में लगे अजीत सिंह कहते हैं कि यह बाढ़ भविष्य की बड़ी तबाही का संकेत है। नदी की हद समझनी होगी। कारोबारी अरुण गुप्ता कहते हैं कि इस बार की बाढ़ से सबक लेकर लोगों को कब्जे स्वयं हटा लेने चाहिए।
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पयस्वनी और सरयू को भी नाला बना दिया
पयस्वनी व सरयू के उद्गम स्थल ब्रह्मकुंड व कामदगिरि पर्वत से रामघाट में मंदाकिनी के संगम स्थल तक का क्षेत्र अवैध निर्माणों से पटा पड़ा है। जहां कच्ची झोपड़ियां थीं, अब पक्के मकान हैं। इन्हें हटाने की आवश्यकता जिम्मेदार सिंचाई व पर्यटन विभाग या प्रशासन ने नहीं समझी, उल्टे गंदगी रोकने के नाम पर दीवार तान दी गई। बारिश में यह दीवार जल प्रवाह में बाधा बनती है। इस बार जब बाढ़ आई तो दीवार की वजह से पानी इधर-उधर फैला और सतना-चित्रकूट मार्ग के लिए बनाया गया बाईपास धंस गया है।
19 दिन में नौ बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंची मंदाकिनी
बहाव का रास्ता न मिलने का ही नतीजा है कि 14 अगस्त से दो सितंबर तक 19 दिन में मंदाकिनी नौ बार खतरे के निशान 126.500 मीटर के पार पहुंची। कुछ घंटों के लिए पानी उतरा तो फिर नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। मौसम विशेषज्ञ बताते है कि 29 अगस्त को मंदाकिनी की धारा का वेग लगभग 120 किमी प्रति घंटा का रहा, इसीलिए तबाही पिछली बाढ़ से अधिक हुई।
मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ के बाद अब फिर से सर्वे कराकर हालात समझेंगे। नदियों के बफर जोन या तीर्थ क्षेत्र में कहीं अवैध कब्जे मिलने पर उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई कराएंगे।
-पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी चित्रकूट।
