भूमि अधिग्रहण में फंसी एटा-कासगंज रेल लाइन ब्राडगेज परियोजना, आज खुलेंगी निविदाएं
एटा-कासगंज ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण अटकी हुई है, जिसमें लगभग 116 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण बाकी है। ...और पढ़ें

एटा रेलवे स्टेशन।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, एटा। एटा-कासगंज ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना एक बार फिर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में फंसी हुई है। एटा और कासगंज जनपदों में करीब 116 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अब तक पूरा नहीं हो सका है।
सबसे बड़ी बाधा 20-एफ गजट अधिसूचना का जारी न होना है, जिसके कारण किसानों को मुआवजा वितरण और रेलवे को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। प्रशासनिक स्तर पर धीमी कार्रवाई से परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
तकनीकी और वित्तीय निविदाएं खोलेगा
मंगलवार परियोजना के लिए अहम दिन माना जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे मंडल गोरखपुर आज एटा-कासगंज रेल लाइन परियोजना की तकनीकी और वित्तीय निविदाएं खोलेगा। रेलवे विभाग ने निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण एजेंसियों को कार्य आदेश जारी करने की तैयारी कर ली है, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कराया जा सके।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में मिट्टी भराई, छोटे-बड़े पुलों का निर्माण और ट्रैक बिछाने से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग का प्रयास है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद निर्माण एजेंसियां मौके पर काम शुरू कर दें।
जिला प्रशासन पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने का दबाव भी बढ़ा
हालांकि नियमों के मुताबिक निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक रेलवे को अधिग्रहित भूमि का कब्जा मिल जाना चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। ऐसे में अब जिला प्रशासन पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने का दबाव भी बढ़ गया है।
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हर वर्ग को मिलेगा लाभ
परियोजना शुरू होने से एटा और कासगंज समेत आसपास के क्षेत्रों के व्यापार, परिवहन और आवागमन को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यापारियों को माल ढुलाई में सुविधा मिलेगी, वहीं छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और यात्रियों को दिल्ली, लखनऊ और बरेली जैसे प्रमुख शहरों के लिए बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा। लंबे समय से सीधी रेल लाइन की मांग कर रहे लोगों की निगाहें अब इस परियोजना की प्रगति और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।