एटा में अरिंद नदी की बाढ़ से 20 गांवों में हाहाकार, हजारों बीघा फसलें डूबीं
किसान प्रशासन से तत्काल सर्वे, मुआवजे और जल निकासी की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ...और पढ़ें

गांव जनसोई में नदी की बाढ़ से हुए जलभराव के चलते मक्का की फसल में भरा पानी- जागरण
HighLights
अरिंद नदी की बाढ़ से 20 गांवों में तबाही।
पांच हजार बीघा धान-मक्का की फसलें जलमग्न।
किसान मुआवजे और जल निकासी की कर रहे मांग।
जागरण संवाददाता, एटा। वर्षा के बाद उफान पर आई अरिंद नदी ने क्षेत्र के करीब 20 गांवों में तबाही मचाने का काम शुरू कर दिया है। पिछले पांच दिनों से नदी का पानी खेतों में भरा हुआ है, जिससे लगभग पांच हजार बीघा में धान और मक्का की फसल जलमग्न हो गई है। कई किसानों की खेतों में कटी पड़ी मक्का की फसल तेज बहाव में बह गई, जबकि धान की नई रोपाई भी पूरी तरह पानी में डूब गई है। इससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मेहनत और खर्च के साथ धान की रोपाई कराई थी। वहीं मक्का की फसल कटने के बाद खेतों में पड़ी थी, जिसे जल्द ही घर ले जाना था। लेकिन वर्षा और अरिदं नदी में आई बाढ़ ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
नदी में पानी आने से मक्का व धान की फसलें डूबने से नुकसान की आशंकाएं बढ़ी
खेतों में कई फुट तक पानी भरा होने के कारण किसान अपनी बची हुई फसल भी नहीं निकाल पा रहे हैं। करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में नदी का पानी फैलने से जनसोई, संतीपुर, जमालपुर, मलामई, मंगरौली, दूल्हा, दयारामपुर, रसीदपुर, नगला नारी सहित करीब 20 गांवों की हजारों बीघा कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
किसान महावीर सिंह का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो धान और मक्का की पूरी फसल नष्ट हो जाएगी और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
पांच दिनों से नहीं सुन रहे राजस्व अधिकारी
पीड़ित किसान रामसेवक ने आरोप लगाया कि पिछले पांच दिनों से वे राजस्व विभाग के अधिकारियों और संबंधित लेखपालों को फोन कर स्थिति से अवगत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन किसी ने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। इससे किसानों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा तक नहीं ले रहे हैं।
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करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में नदी का पानी फैलने से हजारों बीघा कृषि भूमि प्रभावित
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों का तत्काल सर्वे कराया जाए, फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाया जाए तथा जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था कर किसानों को राहत पहुंचाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो नुकसान और बढ़ जाएगा।
किसानों की समस्या से जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को लगातार अवगत कराने का प्रयास किया गया, लेकिन सहायता तो दूर, अधिकारियों ने फोन तक नहीं उठाया। सरकार किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन संकट की इस घड़ी में किसान खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं।
पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा, भाकियू प्रदेश सचिव
शासन और प्रशासन की अनदेखी की वजह से किसान परेशान है। खेतों में फसलें बर्वाद हो रही हैं। अगर किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
सुखराम कुशवाह, किसान
नदी के बहाव और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए टीम भेजी जाएगी। जो भी संभव होगा, ग्रामीणों की मदद होगी। नदी का बहाव कहां पर रुक रहा है, उसको दिखवाकर सुचारू किया जाएगा।
रमेश मौर्य, एडीएम न्यायिक