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    एटा हत्याकांड: 10 साल बाद चार दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट का बड़ा फैसला

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 02:38 PM (GMT+05:30)

    एटा के निधौली कलां में 2016 के एक चर्चित हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चार दोषियों को आजीवन कारावास और 25-25 ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. 2016 के निधौली कलां हत्याकांड में कोर्ट का फैसला

    2. चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई

    3. प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी

    जागरण संवाददाता, एटा। करीब दस वर्ष पुराने चर्चित हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। थाना निधौली कलां क्षेत्र में वर्ष 2016 में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट ने चार आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
    मामला थाना निधौली कलां क्षेत्र के गांव हुसैनपुर ककराला का है। अभियोजन के अनुसार, गांव निवासी ब्रजेश ने 23 अगस्त 2016 को थाना निधौली कलां में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

    पुलिस को बताया था कि उनका भाई प्रवेंद्र निधौली कलां से पैदल अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के ही हरेंद्र अपने साथियों के साथ बाइक से वहां पहुंचा। आरोप है कि चारों लोग प्रवेंद्र को खेत की ओर ले गए, जहां गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल प्रवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।

    निधौली कलां में पैदल घर लौट रहे युवक की गोली मारकर हत्या की थी

    रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। शासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) रेशपाल सिंह राठौर ने मामले की पैरवी की।

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    कोर्ट ने चारों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

    मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश धर दुबे की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पंचम सिंह, भूपेंद्र सिंह, हरेंद्र और मनोज को हत्या का दोषी करार दिया। कोर्ट ने चारों को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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    अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आदेश में कहा गया है कि यदि कोई दोषी जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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