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    गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों के बिजली लोड पर उठे सवाल, निवासियों ने ऑडिट की उठाई मांग

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 05:25 AM (IST)

    गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में बिजली लोड वितरण पर गंभीर सवाल उठे हैं, निवासी स्वीकृत और वितरित लोड के तकनीकी व वित्तीय ऑडिट की मांग कर रहे हैं। उ ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

    HighLights

    1. हाईराइज सोसायटियों में बिजली लोड वितरण पर सवाल उठे।

    2. निवासियों ने तकनीकी और वित्तीय ऑडिट की मांग की।

    3. स्वीकृत से अधिक लोड आवंटन पर चिंता जताई गई।

    लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। हाईराइज सोसायटियों में बिजली लोड वितरण व्यवस्था को लेकर फ्लैट खरीदारों और निवासियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विद्युत निगम को प्रत्येक ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के स्वीकृत लोड और आंतरिक रूप से वितरित लोड का तकनीकी व वित्तीय आडिट कराना चाहिए।

    इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्युत निगम से स्वीकृत लोड और फ्लैटों में आवंटित लोड में कितना अंतर है तथा फिक्स्ड चार्ज किस आधार पर वसूला जा रहा है।

    निवासियों का आरोप है कि कई सोसायटियों में विद्युत निगम से स्वीकृत क्षमता की तुलना में कहीं अधिक लोड फ्लैटों में आवंटित किया गया है। उनका कहना है कि यह मामला केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसफार्मर क्षमता, डीजी बैकअप, फायर सेफ्टी, लोड प्रबंधन और विद्युत सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

    सार्वजनिक नहीं होती रिपोर्ट

    उनका कहना है कि समय-समय पर लोड आडिट की बात तो होती है, लेकिन इसकी रिपोर्ट और कार्रवाई सार्वजनिक नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। निवासियों ने राजनगर एक्सटेंशन, क्रासिंग रिपब्लिक, ट्रांस हिंडन समेत जिले की सभी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों का व्यापक आडिट कराने की मांग की है।

    साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि सोसायटीवार स्वीकृत लोड, वितरित लोड, फिक्स्ड चार्ज, प्रीपेड मीटर कटौती और लोड वृद्धि से जुड़े शुल्क की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यदि कहीं नियमों के विपरीत अधिक वसूली हुई है तो उसका समायोजन या रिफंड कराया जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।

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    कई ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बिल्डर संबंधित विभागों की अनदेखी या मिलीभगत का लाभ उठाकर स्वीकृत क्षमता से अधिक आंतरिक लोड वितरित कर देते हैं। हैंडओवर के बाद नई एओए या आरडब्ल्यूए को इसकी पूरी जानकारी नहीं होती और वही व्यवस्था वर्षों तक चलती रहती है। उन्होंने कहा कि कई सोसायटियों को विद्युत निगम की ओर से लोड आडिट के नोटिस भी मिल चुके हैं। भविष्य में यदि आर्थिक दंड या अन्य कार्रवाई होती है तो उसका भार पूरी सोसायटी के निवासियों पर पड़ेगा। इसलिए बिल्डर की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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    पुनीत गोयल, पूर्व सचिव, गौर कास्केड्स सोसायटी

    सोसायटी में फ्लैट धारकों को करीब 2250 केवीए का लोड आवंटित किया गया, जबकि विद्युत निगम से लगभग 900 केवीए का ही लोड स्वीकृत कराया गया। अब अधिकांश फ्लैट आबाद होने के कारण वास्तविक बिजली मांग स्वीकृत क्षमता से अधिक हो जाती है, जिससे बार-बार तकनीकी दिक्कतें आती हैं। उन्होंने बताया कि विद्युत निगम की ओर से करीब 95 लाख की सिक्योरिटी जमा करने के नोटिस भी दिए जा चुके हैं।

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    दीपांशु मित्तल, पूर्व महासचिव, ब्रेव हार्ट्स सोसायटी

    उदाहरण के तौर पर ऐसे समझें पूरा मामला

    यदि किसी सोसायटी का विद्युत निगम से स्वीकृत लोड दो हजार केवीए है और फिक्स्ड चार्ज 108 रुपये प्रति केवीए है, तो निगम को देय फिक्स्ड चार्ज 2.16 लाख प्रतिमाह होगा।

    यदि वही सोसायटी आंतरिक व्यवस्था में छह हजार केवीए लोड आवंटित कर उसी आधार पर फिक्स्ड चार्ज वसूले, तो यह राशि 6.48 लाख प्रतिमाह तक पहुंच सकती है। यानी 4.32 लाख प्रतिमाह और करीब 51.84 लाख प्रतिवर्ष का अंतर बन सकता है।

    इसी तरह 500 फ्लैटों वाली सोसायटी में दो हजार केवीए स्वीकृत लोड के आधार पर प्रति फ्लैट फिक्स्ड चार्ज करीब 432 रुपये प्रतिमाह होगा, जबकि छह हजार केवीए के आधार पर यह 1,296 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकता है। यानी प्रति फ्लैट करीब 864 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त अंतर पड़ सकता है।