बिना सूचना बढ़ा दिया बिजली बिल का बोझ, गाजियाबाद के उपभोक्ताओं को अब चुकानी पड़ रही है भारी सुरक्षा निधि
गाजियाबाद में 1.37 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई के बिल में बढ़ी हुई सुरक्षा निधि का भुगतान करना होगा। पुराने कनेक्शन धारकों को मामूली जमा राश ...और पढ़ें

गाजियाबाद में लोगों पर पड़ रहा बिजली बिल का बोझ। फोटो: सांकेतिक
HighLights
गाजियाबाद में 1.37 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ा स्वीकृत विद्युत भार
जुलाई के बिल में 15.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा निधि जोड़ी गई
पुराने कनेक्शन धारकों को चुकाना होगा कई गुना अधिक शुल्क
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले में 1.37 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार बढ़ाए जाने के बाद सबसे अधिक असर पुराने बिजली कनेक्शन धारकों पर पड़ रहा है।
वर्षों पहले घरेलू बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं ने उस समय की दरों के अनुसार महज 50 से 100 रुपये तक सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपाजिट) जमा कराई थी, लेकिन अब स्वीकृत भार बढ़ने के बाद उन्हें मौजूदा दरों के अनुसार कई गुना अधिक सुरक्षा निधि का अंतर चुकाना पड़ रहा है। विद्युत निगम ने यह अतिरिक्त राशि जुलाई के बिजली बिल में जोड़ दी है।
जिले में 1,37,522 उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार बढ़ाया गया है। इसके साथ ही तीनों जोन के उपभोक्ताओं पर 15.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा निधि का भार डाला गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जोन-1 में 3.73 करोड़ रुपये, जोन-2 में 5.78 करोड़ रुपये और जोन-3 में 5.94 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा निधि बिलों में जोड़ी गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में 79 पुराने उपभोक्ताओं ने वर्षों पहले कुल 5,734 रुपये सुरक्षा निधि जमा कराई थी।
स्वीकृत भार बढ़ने के बाद इन्हीं उपभोक्ताओं की देय सुरक्षा निधि बढ़कर करीब 4.83 लाख रुपये हो गई है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने कनेक्शनों की संख्या अधिक होने के कारण सुरक्षा निधि में वृद्धि का प्रभाव और भी ज्यादा देखने को मिल रहा है।
केस स्टडी-1
मोदीनगर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1985 में दो किलोवाट का घरेलू बिजली कनेक्शन लिया था। उस समय उन्होंने केवल 30 रुपये सुरक्षा निधि जमा कराई थी। अब मोबाइल पर आए संदेश से पता चला कि बिना पूर्व सूचना उनका स्वीकृत विद्युत भार दो किलोवाट से बढ़ाकर तीन किलोवाट कर दिया गया है।
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जुलाई के बिजली बिल में पहले जमा 30 रुपये समायोजित करने के बाद 1,170 रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा निधि भी जोड़ दी गई है। उनका कहना है कि बिना सूचना एकमुश्त इतनी बड़ी राशि जोड़ने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है।
केस स्टडी-2
विजयनगर निवासी राजेश शर्मा ने बताया कि उनका घरेलू बिजली कनेक्शन वर्ष 1996 का है। उस समय एक किलोवाट कनेक्शन पर उन्होंने करीब 75 रुपये सुरक्षा निधि जमा कराई थी। हाल ही में मोबाइल पर लोड बढ़ने का संदेश मिला, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इसके साथ सुरक्षा निधि का अंतर भी जमा करना होगा।
जुलाई का बिल आने पर पता चला कि स्वीकृत भार बढ़ने के कारण पहले जमा राशि समायोजित कर अतिरिक्त सुरक्षा निधि जोड़ दी गई है। उनका कहना है कि पुराने उपभोक्ताओं के लिए एकमुश्त इतनी राशि जमा करना आसान नहीं है। यदि पहले सूचना दी जाती तो वे निगम से जानकारी लेकर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा सकते थे।
स्वीकृत भार वास्तविक बिजली उपयोग के आधार पर नियमानुसार संशोधित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को भविष्य में ओवरलोड उपयोग पर लगने वाली पेनाल्टी से राहत मिलेगी।
- अनिल कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, जोन-प्रथम, गाजियाबाद
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