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    गोरखपुर में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के नाम पर जालसाजी, बैंक शाखा प्रबंधक पर केस

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 09:52 PM (IST)

    गोरखपुर में पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के नाम पर धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि उन्ह ...और पढ़ें

    प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के नाम पर जालसाजी।

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    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पंजाब नेशनल बैंक के वाराणसी में तैनात एक शाखा प्रबंधक संजीव सिंह के विरुद्ध जालसाजी, कूटरचना और धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर निवासी भोला नाथ मौर्य की शिकायत यह कार्रवाई हुई है।

    आरोप है कि प्रधानमंत्री मुद्रा लोन दिलाने का विश्वास जीतकर पीड़ित की मां के खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर दो लाख रुपये लिए, बाद में लोन कराने के नाम पर लिए गए सुरक्षा चेक को बाउंस कराकर परिवार को ही मुकदमे में फंसा दिया।

    इंदिरा नगर निवासी भोला नाथ मौर्य ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र देक बताया था कि उनकी माता रामरती देवी के नाम से नहर रोड पर मकान है। वर्ष 2015 में बैंक के फील्ड ऑफिसर संजीव सिंह से उनका परिचय हुआ।

    संजीव ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत दो लाख रुपये का ऋण दिलवाया, जिससे भोला नाथ ने साइबर कैफे, फोटो कापी व स्टेशनरी की दुकान शुरू की और समय से किस्त चुकाते रहे। कुछ दिन बाद संजीव सिंह का तबादला संतकबीरनगर के नाथनगर शाखा में शाखा प्रबंधक पद पर हो गया।

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    आरोप है कि उन्होंने नहर ोरोड़ स्थित उनके मकान को किराए पर लिया और उसकी मरम्मत के नाम पर खर्च कराया। इसके बाद उन्होंने रामरती देवी के नाम नाथनगर शाखा में नया खाता खुलवाने का दबाव बनाया, जबकि पहले से कौड़ीराम शाखा में संयुक्त खाता मौजूद था।

    संजीव ने बताया कि यह चालू खाता है और पासबुक नहीं बनेगी। परिवार को खाते का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया। पीड़ित के मुताबिक, कौड़ीराम शाखा के संयुक्त खाते में जमा दो लाख रुपये की जानकारी मिलने के बाद संजीव सिंह ने भाई के साथ ही उनका भी फर्जी हस्ताक्षर कर पूरी रकम पीएनबी मेटलाइफ की बीमा पालिसी में निवेश कर दी।

    खाते के शून्य होने का एसएमएस आने पर जब पूछताछ की गई तो टालमटोल की गई। इसके बाद तीन लाख रुपये का ऋण देने के नाम पर सुरक्षा चेक लिया गया और राशि खाते में ट्रांसफर की गई। पीड़ित का कहना है कि न तो बीमा की राशि लौटी और न खाता विवरण मिला।

    आरोप है कि सुरक्षा चेक खो जाने की बात कहकर बाद में उसे बाउंस कराकर पीड़ित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया। आरटीआइ से मिली जानकारी में बचत खाता खोले जाने और आवेदन पत्र पर कथित कूटरचित हस्ताक्षर की बात सामने आई।

    पीड़ित ने आरोप लगाया कि उनकी मां अंगूठा लगाती हैं जबकि बैंक अधिकारी ने नाथनगर में जो खाता खुलवाया था, उसमें हस्ताक्षर किया गया है। सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि संजीव सिंह के विरुद्ध जालसाजी, कूटरचना और धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया गया है। साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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