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    'रुपये दो और मनचाही डिग्री लो..', मोनाड यूनिवर्सिटी की 'सीक्रेट डेस्क' से कैसे बंट रही थीं फर्जी डिग्रियां? पढ़ें Inside Story

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 11:38 AM (IST)

    मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्रियों के सत्यापन के लिए एक गोपनीय डेस्क बनाई गई थी, जो नकली डिग्रियों को असली बताती थी। ...और पढ़ें

    कानूनी पेचीदगी से बचने के लिए यूनीवर्सिटी ने एक रिपोर्ट दर्ज करा दी थी कि उनका रिकाॅर्ड रूम आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गया है।

    कानूनी पेचीदगी से बचने के लिए यूनीवर्सिटी ने एक रिपोर्ट दर्ज करा दी थी कि उनका रिकाॅर्ड रूम आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गया है।

    HighLights

    1. फर्जी डिग्रियों के सत्यापन को बनी गोपनीय डेस्क।

    2. रिकॉर्ड रूम में आग लगने की झूठी रिपोर्ट।

    3. सैकड़ों फर्जी डिग्रीधारकों ने पाई देश-विदेश में नौकरी।

    जागरण संवाददाता, हापुड़। मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्रियों के सत्यापन के लिए एक गोपनीय डेस्क बनाई गई थी। वहां पर जो डिग्री सत्यापन के लिए भेजी जाती थीं, उनको सत्यापित करके असली बता दिया जाता था। हालांकि, कानूनी पेचीदगी से बचने के लिए यूनीवर्सिटी ने एक रिपोर्ट दर्ज करा दी थी कि उनका रिकाॅर्ड रूम आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गया है। यह जानकारी मंगलवार को सीडीओ की अध्यक्षता वाली टीम की जांच में सामने आई।

    पढ़ने या परीक्षा देने का कोई रिकाॅर्ड ही नहीं

    पलवल से माेनाड पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्षा रेखा के पति नरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके कार्यालय में संविदा पर मोनाड की डिग्रियों पर 24 युवक नौकरी कर रहे हैं। हटाए जाने पर वह कोर्ट से स्टे ले आए हैं। जांच में पता चला है कि उनकी डिग्रियां फर्जी हैं, जबकि मोनाड से उनको सत्यापित कर दिया गया है। जबकि मोनाड के पास उनके पढ़ने या परीक्षा देने का कोई रिकाॅर्ड ही नहीं है। पलवल में विभिन्न विभागों में ऐसे 74 युवक नौकरी कर रहे हैं।

    पीएचडी की डिग्रियों की बिक्री भी की गई 

    मोनाड यूनिवर्सिटी का फर्जी डिग्री-मार्कशीट का धंधा बहुत बड़े स्तर पर चल रहा था। डिग्री देने वालों को नौकरी लगवाने में भी यूनिवर्सिटी द्वारा सहायता की जाती थी, जिससे युवाओं में फर्जी डिग्रियों का भरोसा और दृढ़ हो सके। इसी क्रम में गुरुग्राम की एक प्लेसमेंट कंपनी के सहारे सैकड़ों डिग्रिधारियों को मल्टी नेशनल कंपनियों में विदेश भी भेजा गया है। बड़ी-बड़ी कंपनियों में मोनाड से डिग्री लेकर नौकरी करने वालों की भरमार है। अधिकारियों को आशंका है कि थोक में पीएचडी की डिग्रियों की बिक्री भी की गई है।

    कागज से लेकर प्रिंट के फॉन्ट तक में समानता

    मोनाड यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वालों ने देश में ही नहीं विदेश तक भी नौकरी पा ली। दरअसल फर्जी डिग्री की कीमत यूनिवर्सिटी मनमानी वसूलती थी। इसके साथ ही गारंटी होती थी कि कोई भी नकली होने की पहचान नहीं कर सकेगा। कागज से लेकर प्रिंट के फॉन्ट तक में कोई अंतर नहीं होता था। वहीं, संबंधित कंपनी द्वारा पत्राचार किए जाने पर यूनिवर्सिटी से डिग्री के वैध होने की पुष्टि कर दी जाती थी।

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    बोल देते आग में जलकर खाक हुए रिकॉर्ड

    कई मामले ऐसे में आए, जबकि संबंधित कंपनी की टीम यूनिवर्सिटी में डिग्रिधारियों का रिकाॅर्ड देखने भी पहुंची। तब बता दिया गया कि आग लगने से विश्वविद्यालय का रिकाॅर्ड जल गया है।

    हालांकि, डिग्री बिल्कुल असली है। ऐसा ही पलवल के जिला पंचायत में नौकरी करने वालों के मामले में हुआ है।

    ऐसे में डिग्री पाने वालों ने धड़ल्ले से देश-विदेश की कंपनियों में नौकरी पाई। स्थानीय कंपनियों के साथ ही मल्टीनेशनल कंपनियों में भी इनको नौकरी दी गईं।

    गुरुग्राम की एक प्रतिष्ठित प्लेसमेंट कंपनी ने तो मोनाड के हजारों डिग्रिधारियों को विदेश भेजकर नौकरी लगवा थी। स्थिति यह रही की मोनाड द्वारा थोक में नकली डिग्री बेची गईं।

    दर्जनों युवक करते रहे नौकरी

    सूत्रों का कहना है कि 50 साल पहले की यूनिवर्सिटी से ज्यादा पीएचडी की डिग्री मोनाड ने पांच साल में बेच दी। इस आधार पर एसटीएफ की जांच अब प्लेसमेंट देने वाली कंपनियों तक जा पहुंची है। मोनाड द्वारा फर्जी डिग्री देने के साथ ही युवकों को अपने यहीं पर भी नौकरी पर रख लिया। दर्जनों युवक फर्जी डिग्री के आधार पर मोनाड में ही नौकरी करते रहे।

    "यह मामला बहुत बड़ा है। इसकी जांच अभी आरंभ की गई है। हमको उपलब्ध रिकाॅर्ड का गहनता से अध्ययन कर रहे हैं। उससे प्राप्त जानकारियों के आधार पर आगे बढ़ा जा रहा है। नरेंद्र सिंह द्वारा उपलब्ध कराई गई शिकायत-साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है।"

    -श्रुति शर्मा, सीडीओ व जांच अधिकारी।

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