हाथरस में 15वें वित्त आयोग से 22 करोड़ जारी, नगर पालिकाओं और पंचायतों में विकास को मिलेगी रफ्तार
हाथरस जिले की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में विकास कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग से 22 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस धनराशि से रुके हुए विकास का ...और पढ़ें

हाथरस नगर पालिका।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
योगेश शर्मा, हाथरस। धन के अभाव में नगर पालिका और नगर पंचायतों में थमे विकास कार्य अब फिर से रफ्तार पकड़ सकेंगे। 15 वें वित्त आयोग की शासन ने प्रशासन को किस्त के रूप में कुल 22 करोड़ रुपये जारी कर दिया है। सबसे अधिक पैसा हाथरस नगर पालिका को मिला है जबकि सबसे कम धन सिकंदराराऊ नगर पालिका मिला है।
बताते हैं कि सिकंदराराऊ को कुछ दिन पहले ही लाखों रुपये विकास कार्य के लिए दिया गया था। 15 वें वित्त आयोग से मिले धन से नाली- खरंजों के अलावा दूसरी बुनियादी जरूरताें पर पैसा खर्च किया जाएगा।
22 करोड़ से दौड़ेगा नगर पालिका, नगर पंचायतों में विकास का पहिया
बता दें कि जनपद में दो नगर पालिका और सात नगर पंचायतें हैं जिनमें नगर पालिका हाथरस और सिकंदराराऊ जबकि नगर पंचायत सासनी, पुरदिलनागर, मुरसान, मेंडू, सहपऊ,हसायन और सादाबाद हैं। सभी नगर पालिका और नगर पंचायत में 15वीं वित्त आयोग की किस्त आ चुकी है। सभी नगर पालिका और नगर पंचायत में अब विकास का पहिया दौड़ेगा।
15 वें वित्त आयोग की शासन ने प्रशासन को जारी की है किस्त, चहुंमुखी होगा विकास
हालांकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि नगर पालिका और नगर पंचायतें आत्मनिर्भर बनें और खुद कमाई करके नगर पालिका में विकास कार्य कराएं। मगर ऐसा हो नहीं पाता। बल्कि विकास कार्य कराने कि हर बार शासन ओर से धन के लिए तांकना पड़ता है। 15 वें वित्त आयोग से जो धन रिलीज कर दिया गया है।
नाली-खरंजा और हैंडपंप और बिजली व्यवस्था पर खर्च किया जाएगा पैसा
सिकंदराराऊ नगर पालिका को सबसे कम 23 लाख रुपया और सबसे अधिक हाथरस नगर पालिका को 12 करोड़ रुपये दिया गया है। जबकि मुरसान नगर पंचायत को एक करोड़, सासनी को दो करोड़, हसायन को 40 लाख, मेंडू को दो करोड़, पुरदिलनगर को डेढ़ करोड़, सहपऊ को 80 लाख, सादाबाद को ढाई करोड़ रुपये मिले हैं। नगर पालिका और नगर पंचायतों को धन मिलने के बाद विकास कार्य फिर रफ्तार पकड़ सकेगा।
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सच तो ये है कि तो भी पैसा नगर पंचायतों में विकास कार्य के लिए आता है उससे अपने नजदीकी लोगों की गलियां बनवाने में खर्च होता है। गरीब बस्तियों में काम नहीं होता।
मोहित चौहान,वेदई सादाबाद।
नगर पालिका हाथरस को सबसे अधिक पैसा भले ही मिला तो मगर विकास कार्य कहीं नजर नहीं आएगा। आज भी गलियां टूटी हैं और कल भी गलियां टूटी ही दिखेंगी।
प्रियंका शर्मा, श्रीनगर हाथरस
सिकंदराराऊ नगर पालिका को सबसे कम पैसा मिलना हैरानी की बात है। महज 23 लाख रुपया में क्या ही विकास हो पाएगा। सरकार को नगर पालिका को पैसा देना चाहिए।
गब्बर सिंह
सरकार से विकास कार्य के लिए पूरा पैसा आता है। मगर विकास कार्यों में कहीं खर्च होता नहीं दिखता। पैसा हर साल 15 वें वित्त आयोग से मिलता है। मगर कहां जाता है कोई पता नहीं।
कुलदीप गुप्ता, सासनी
15 वें राज्य वित्त आयोग से नगर पालिका और नगर पंचायतों को करीब 22 करोड़ रुपये मिला है। इस धन से अब नगर पालिका और नगर पंचायतों में विकास कार्य हो सकेंगे।
प्रशांत तिवारी, एडीएम वित्त एवं राजस्व।