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    CSJMU छात्रों को बड़ा झटका: हेल्थ साइंसेज के सभी पाठ्यक्रमों की फीस 25% तक बढ़ी; जानें अब किस कोर्स के लिए कितनी फीस

    Updated: Mon, 18 May 2026 09:51 PM (IST)

    सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज ने सीटों की संख्या घटने के कारण विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में 20-25% की बढ़ोतरी की है। यह वृद्धि राष्ट्रीय सहबद् ...और पढ़ें

    सीएसजेएमयू कानपुर।

    सीएसजेएमयू कानपुर।

    HighLights

    1. सीटों की संख्या कम होने पर औसत 25 प्रतिशत फीस में बढ़ोतरी की

    2. एनसीएएचपी के कारण सीटें 270 से घटकर 160 हुईं।

    3. पूरे देश में एलाइड हेल्थ केयर पाठ्यक्रमों में तय कर दी है सीटें

    जागरण संवाददाता, कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल आफ मेडिकल साइंस ने अपने विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दिया है। विश्वविद्यालय ने यह निर्णय राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) के गठन के बाद से सत्र 2026-27 से सभी एलाइड हेल्थ केयर पाठ्यक्रमों के लिए नए मानक तय किए है। इसके तहत अब एलाइड हेल्थ केयर के विभिन्न विषयों की सीटें और उनके सिलेबस आयोग की ओर से तय किया गया है।

    आयोग ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है जिस पाठ्यक्रम में जितनी सीटें तय की गई है सभी संस्थाओं में उनकी सीटें रहेगी। अब कोई राज्य सरकार या विश्वविद्यालय उसे अधिक सीटें नहीं बढ़ा सकता है। आयोग के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय में नए सिरे से अपने सभी एलाइड हेल्थ केयर विषयों के पाठ्यक्रमों का सिलेबस और सीटों को नए सिरे तैयार किया है। जिसके कारण विश्वविद्यालय के स्कूल आफ हेल्थ साइंसेस की तीन पाठ्यक्रमों की कुल सीटें 270 से घटकर अब 160 रह गई है। वहीं छात्र-शिक्षक अनुपात को भी आयोग ने बढ़ा दिया है। ऐसे में सीटें घटने के कारण विश्वविद्यालय को मिल रही फीस में कमी को पूरा करने के लिए फीस में बढ़ोतरी किया गया है।


    स्कूल आफ हेल्स साइंसे के निदेशक डा. मुनीश रस्तोगी ने बताया कि आयोग ने पूरे देश में एलाइड हेल्थ केयर पाठ्यक्रमों की सीटें कितनी होगी यह तय किया है। आयोग की इस आदेश के बाद हमारे विभाग की काफी सीटें कम हो गई है। उन्होंने बताया कि तीन पाठ्यक्रमों में सबसे ज्यादा सीटें कम हुई है। इन तीनों पाठ्यक्रमों से विश्वविद्यालय को कुल दो करोड़ 20 लाख रुपए फीस मिलता था, जो सीटें घटने के कारण 1 कराेड़ 60 लाख के आसपास रह गया है। इसके अलावा आयोग ने छात्र शिक्षक अनुपात में बदलाव किया है, ऐसे में नए शिक्षकों की भर्ती भी इस सत्र में करनी होगी।


    उन्होंने बताया कि विभाग सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित होता है, ऐसे में सीटें घटने से आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया था। जिसके बाद कुलपति की सहमति के बाद फीस बढ़ाया गया है।उन्होंने बताया कि बैचलर आफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) में अभी तक 120 सीटें थी, जो नए सत्र से घटकर 100 ही रह गई है। इस विषय में छात्रों को सालाना 90 हजार रुपए फीस लिया जाता था, जिसे बढ़ाकर अब 1 लाख 20 हजार रुपए कर दिया।

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    बैचलर आफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस (बीएमएलएस) की 120 सीटें घटकर 60 रह गई है। इस विषय की फीस भी 90 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 20 हजार रुपए कर दिया है। वही मास्टर इन मेडिकल रेडियोलाजी एंड इमेजिंग टेक्नोलाजी (एमएमआरआइटी) में अब 30 की जगह 15 सीटें रह गई है, इस विषय की फीस 1 लाख 2 हजार रुपए कर दिया है। इसके अलावा बाकी विषयों की फीस में दस से 15 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है।

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