दो IPS डॉक्टर खोलेंगे ITBP जवान की मां हाथ कटने की लापरवाही का राज, दोनों अस्पतालों से पूछे जाएंगे 50 सवाल
कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने के मामले में दोबारा जांच शुरू हुई है। इस बार एमबीबीएस डिग्रीधारी दो आईपीएस अधिकारियों सहित एक संयुक्त टीम ...और पढ़ें

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल (मध्य में) साथ में (बाएं से ) अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था डा. विपिन ताडा, आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और सीएमओ डा. हरिदत्त नेमी (दाएं)। जागरण
HighLights
पर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा और प्रशिक्षु आइपीएस सुमेध मिलिंद दोनों हैं एमबीबीएस
अस्पताल की लापरवाही के चलते काटे गए मां के हाथ को लेकर न्याय मांगता फिर रहा था जवान
सीएमओ की गोलमोल जांच रिपोर्ट पर पुलिस आयुक्त नाराज, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा से की बात
गरण संवाददाता, कानपुर। आईटीबीपी के जवान की मां का हाथ कटने के मामले में दोबारा जांच शुरू हुई है। पिछली बार जांच टीम में जहां केवल स्वास्थ्य विभाग के अफसर शामिल थे, वहीं इस बार स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिस और आईटीबीपी के विशेषज्ञ भी जांच टीम का हिस्सा होंगे। यह जांच टीम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पुलिस के दो अधिकारी शामिल किए गए हैं, वह दोनों एमबीबीएस डिग्री धारक हैं और डाक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से वार्ता के दौरान आईटीबीपी के अधिकारियों व जवानों ने कई बिंदुओं को उठाया था, जो सीएमओ की जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं हैं। पीड़ित विकास ने पुलिस को छह बिंदुओं पर जांच के लिए कहा था। हालांकि अभी तक उन्होंने छह बिंदुओं के बारे में जानकारी नहीं दी है, लेकिन यह तय है कि सीएमओ की जांच में स्पष्ट नहीं था कि आखिर सांस की मरीज महिला का हाथ किन परिस्थितियों में काटना पड़ा।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि आईटीबीपी के अधिकरियों ने पुलिस की कार्रवाई पर विश्वास जताया है, लेकिन वह स्वास्थ्य विभाग को लेकर आशंकित है। इसे देखते हुए ही संयुक्त टीम का गठन किया गया है। इसमें पुलिस के दो अधिकारी शामिल हैं। संयोग से पुलिस के पास इस समय दो अधिकारी अपर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा और प्रशिक्षु आइपीएस सुमेध मिलिंद जाधव एमबीबीएस हैं। इन दोनों को जांच टीम का हिस्सा बनाया गया है। दोनों ने इस प्रकरण की गंभीरता से जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
कृष्णा अस्पताल से कौन-कौन से दस्तावेज लेने हैं, कौन-कौन से सवालों के जवाब मांगने है, सबकुछ तय किया जा चुका है। दोनों पुलिस अधिकारियों ने 50 से अधिक सवाल तैयार किए हैं, जिससे यह तय हो सकेगा कि हाथ कटने के लिए जिम्मेदार कौन है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि रविवार से ही जांच शुरू कर दी जाएगी।
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आठ गाड़ियों में बैठ पहुंच गए थे जवान
इंडो-तिब्बतन बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) जवान की मां के लिए सिस्टम की बेरुखी पर शनिवार को उसके 50 साथी जवान पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंच गए। हथियारों से लैस ये जवान आठ गाड़ियों से पहुंचे थे। अस्पताल की लापरवाही के चलते काटे गए मां के हाथ को आइस पैक में लेकर जवान न्याय के लिए दर-दर भटक रहा था। 20 मई को पुलिस आयुक्त के पास पहुंचा था। पुलिस आयुक्त ने सीएमओ को जांच के लिए कहा था।
गोलमाल रिपार्ट पर भड़के
सीएमओ की गोलमोल जांच रिपोर्ट के बाद मामला बढ़ गया और कमांडेंट के साथ जवान कमिश्नरेट में धमक पड़े। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने इतनी अधिक संख्या में जवानों के आने पर आपत्ति जताई, तब आधे से अधिक जवान परिसर से बाहर निकले। करीब चार घंटे तक कमांडेंट गौरव प्रसाद की पुलिस आयुक्त से बात होने के बाद सीएमओ डा. हरिदत्त नेमी भी आए। उन्हें देख पुलिस आयुक्त ने नाराजगी जताई। कहा कि जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट हूं, जरूरत पड़ी तो राज्यस्तरीय कमेटी से जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। दोबारा जांच कर रिपोर्ट दीजिए।
ये था पूरा मामला
महाराजपुर स्थित आईटीबीपी की 32वीं बटालियन के जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को सांस की परेशानी पर 13 मई को शहर के कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इंजेक्शन लगाने के बाद संक्रमण फैलने से उनका हाथ काला पड़ गया, जिसे 17 मई को पारस हास्पिटल में काटना पड़ा था। पुलिस आयुक्त ने जांच कराई तो सीएमओ ने स्पष्ट रिपोर्ट देने के बजाय संक्रमण की संभावना पर जोर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि हाथ का संक्रमण थर्मा एंबोलिज्म (खून का थक्का जमने) से हो सकता है। यह स्थिति कैसे बनी, इसका कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है।
गलत जांच रिपोर्ट बनाकर बचाने का आरोप
जवानों ने सीएमओ पर गलत जांच रिपोर्ट बनाकर अस्पताल प्रबंधन व डाक्टरों को बचाने का आरोप लगाया। आईटीबीपी कमांडेंट ने पुलिस आयुक्त और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था विपिन ताडा से अलग-अलग बातचीत की।
पुलिस आयुक्त ने सीएमओ से पूछे ये सवाल
पुलिस आयुक्त ने सीएमओ से पूछा- 'क्या इलाज किया गया, क्या दवाएं दी गईं? क्या पहले से हाथ खराब था या बाद में किन परिस्थितियों में हाथ खराब हुआ, जिसे काटने की नौबत आई? इन बिंदुओं पर रिपोर्ट दें। गोलमोल बातें नहीं लिखें।' आईटीबीपी के अधिकारी और जवान सुबह 11:30 बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे तक पुलिस आफिस में ही डटे रहे।
दोबारा जांच रिपोर्ट के बाद मुकदमा
पुलिस आयुक्त ने बताया कि दोबारा जांच रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा। किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। मामले में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा से भी बात की गई है। आईटीबीपी कमांडेंट गौरव प्रसाद ने बताया कि पुलिस पर पूरा भरोसा है। हम अपने जवान के लिए न्याय चाहते हैं। स्वास्थ्य विभाग की गलत रिपोर्ट का फायदा अस्पताल प्रबंधन उठा लेगा। वहीं, सीएमओ ने बताया कि एमबीबीएस के बाद आइपीएस बने दो पुलिस अधिकारियों के साथ वरिष्ठ डाक्टरों की टीम जांच करेगी।