कानपुर से रक्षा क्षेत्र को बड़ी ताकत, DMSRDE-UPTTI का MOU, रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनेगा भारत
डीएमएसआरडीई और यूपीटीटीआइ के बीच हुए एमओयू से रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी अनुसंधान व विकास में कानपुर की भूमिका सुदृढ़ होगी। यह समझौता सेना के लिए विशेष ...और पढ़ें

HighLights
डीएमएसआरडीई-यूपीटीटीआइ एमओयू रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी अनुसंधान को देगा बढ़ावा।
सेना के लिए विशेष फैब्रिक, सुरक्षात्मक वर्दी का होगा विकास।
यह पहल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी।
जागरण संवाददाता, कानपुर। देश में रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में शहर की भूमिका और अधिक सुदृढ़ होगी। क्योंकि डीआरडीओ की इकाई डीएमएसआरडीई और यूपीटीटीआइ के विशेषज्ञ संयुक्त रूप से सेना के लिए विशेष फैब्रिक, सुरक्षात्मक वर्दी, स्मार्ट टेक्सटाइल और उन्नत सुरक्षा उपकरणों के विकास पर संयुक्त रूप से अनुसंधान एवं विकास कार्य करेंगे। र
क्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की जीटी रोड स्थित डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) और उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआइ) के बीच पांच वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इससे रक्षा और सिविल सेक्टर के लिए अत्याधुनिक वस्त्र तकनीकों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
हाल ही में हुए एमओयू के बाद दोनों संस्थान मिलकर सुरक्षात्मक वर्दी, स्मार्ट टेक्सटाइल में अनुसंधान एवं विकास के लिए खाका तैयार करने में जुट गए हैं। यूपीटीटीआइ के निदेशक डा. जी. नलिनकिल्ली ने बताया कि विद्यार्थी अब रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों और शोध परियोजनाओं पर काम कर सकेंगे।
डीएमएसआरडीई में इन प्रमुख रक्षा वस्त्रों और उत्पाद विकसित किए
- लेवल-5 बुलेटप्रूफ जैकेट स्नाइपर राइफल की सात-आठ गोलियों तक से सुरक्षा देने वाली हल्की बुलेटप्रूफ जैकेट है।
- कार्बन फैब्रिक आधारित एनबीसी सूट पहने सुरक्षा कर्मी जहरीली गैसों और रासायनिक एजेंटों को सोखने वाला विशेष फैब्रिक है। इसका पेटेंट हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
- एंटी राइट प्रोटेक्शन सूट पुलिस, पीएसी और अर्द्धसैनिक बलों को दंगों के दौरान पत्थरबाजी और फायरिंग से बचाने में सक्षम है।
- जूट को रीसाइकिल कर कम लागत वाले, मजबूत और पर्यावरण अनुकूल तकनीकी वस्त्र विकसित करने के लिए जूट आधारित तकनीकी फैब्रिक पर अनुसंधान करने में वैज्ञानिक जुटे हैं।
- सुपर हाइड्रोफोबिक फैब्रिक एक ऐसा विशेष कपड़ा है जिस पर पानी, बर्फ और नमी नहीं टिकती है। ये बर्फीली पहाड़ियों वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए विशेष उपयोगी है।
- हल्के लेकिन अधिक मजबूत बुलेट रोधी सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए विकसित सिलिकाल कार्बाइड फाइबर सामग्री तैयार की गई है।
- अत्यधिक गर्मी, ठंड और कठिन मौसम में उपयोग के लिए उन्नत तकनीकी फैब्रिक से विशेष सैन्य वर्दी विकसित हो चुकी है।
- सीबीआरएन प्रोटेक्टिव सूट सैनिकों को रासायनिक, जैविक, रेडियोलाजिकल और परमाणु खतरों से बचाने वाली विशेष प्रकार की किट है।
यूपीटीटीआइ ने वस्त्र प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए डीएमएसआरडीई के साथ एमओयू किया है। यह पहल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। सैनिकों के लिए नई पीढ़ी की वर्दी, उच्च सुरक्षा वाले वस्त्र, अग्निरोधी और रासायनिक सुरक्षा परिधान, स्मार्ट टेक्सटाइल, सिविल उपयोग के लिए भी उन्नत तकनीकी फैब्रिक पर अनुसंधान करके विकसित किए जाएंगे।
प्रो. मुकेश कुमार सिंह, डीन एकेडमिक, यूपीटीटीआइ।
देश की रक्षा जरूरतों के अनुरूप शोध और तकनीकी विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बेहद जरूरी है। इस साझेदारी से नए इनोवेशन, रिसर्च माडल और तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकेंगे, जिनका लाभ उद्योग और रक्षा क्षेत्र दोनों को मिलेगा।
डा. किंग्सुक मुखोपाध्याय, निदेशक, डीएमएसआरडीई।
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