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    दर्द से तड़पती रही ITBP जवान की मां, नहीं आया कोई स्टाफ...आपबीती सुन दहल जाएंगे आप

    By Ankur SrivastavaEdited By: Anurag Shukla
    Updated: Thu, 28 May 2026 05:29 PM (IST)

    आईटीबीपी जवान की मां निर्मला देवी का कानपुर के दो अस्पतालों में इलाज में लापरवाही के कारण हाथ काटना पड़ा। दर्द से तड़पती महिला की सुनवाई नहीं हुई, जिस ...और पढ़ें

    पारस अस्पताल में भर्ती मां।

    पारस अस्पताल में भर्ती मां।

    HighLights

    1. आईटीबीपी जवान की मां का इलाज में लापरवाही से कटा हाथ

    2. कानपुर के कृष्णा और पारस अस्पतालों पर लगा गंभीर आरोप

    3. दर्द से तड़पती रही महिला, डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

    जागरण संवाददाता, कानपुर। दर्द असहनीय था। अस्पताल के बेड पर चीखती-कराहती रही लेकिन अस्पताल में किसी ने नहीं सुना। काफी कहने के बाद स्टाफ आया तो थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा कहकर चला गया। सूजते और काले पड़ते हाथ को नजरअंदाज किया गया। हाथ कटने के बाद आईटीबीपी जवान की पीड़िता मां की आपबीती हर किसी को झकझोर देने वाली है। आईटीबीपी जवान की मां निर्मला देवी की आंखों में आज भी वही दर्द और बेबसी साफ दिखाई देती है।

    जांच अधिकारी ने पारस अस्पताल में भर्ती जवान की मां के बयान दर्ज किए। उन्होंने बताया कि पहले कृष्णा फिर पारस अस्पताल में वह हाथ के दर्द से कराहती रही लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। अगर उसी समय सही इलाज हो जाता तो हाथ बच जाता। वहीं 10 सवालों के जवाब के लिए दोनों अस्पतालों के संचालकों को भी नोटिस भेजा है। जवाब मिलने के बाद आगे विवेचना बढ़ सकेगी।

    हाथ टाइट करके सफेद टेप लगा दिया

    निर्मला देवी के भाई राजकुमार के मुताबिक बहन ने पुलिस को बताया कि कृष्णा अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुई थी तो पहले उन्हें विगो लगाया गया। कुछ देर बाद आसीसीयू में डिप चढ़ाई गई तो उन्हें दर्द होने लगा। फिर दर्द बाद में बढ़ता गया। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ को दर्द के बारे में बताया तो हाथ टाइट करके सफेद टेप लगा दिया गया। स्टाफ बोला, थोड़ी देर बाद ठीक हो जाएगा।

    दर्द से चिल्लाती रही लेकिन कोई नहीं आया

    राजकुमार ने बताया कि दर्द इतना बढ़ गया कि बर्दाश्त के बाहर हो हो गया था। वह चिल्लाती रहीं, लेकिन कोई नहीं आया। दूसरे दिन सुबह हाथ में सूजन और कालापन आने लगा था। तब बेटे ने वीगो हटवाया। राजकुमार के मुताबिक पुलिस ने उनकी बहन का एक पेज का यह बयान लिखा है। बयान की कई प्रतियां बनाकर उनके अंगूठा निशान लिए गए। बयान का वीडियो भी बनाया गया है। पुलिस अपनी विवेचना में बयान को शामिल कर इसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। विवेचक अमान सिंह ने बताया कि अभी जांच चल रही है।

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    13 मई को लेकर गए थे कृष्णा अस्पताल

    फतेहपुर निवासी विकास सिंह महाराजपुर में आईटीबीपी की 32वीं बटालियन में तैनात हैं। उनकी मां निर्मला देवी को सांस लेने में परेशानी होने पर 13 मई को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इंजेक्शन लगाने के बाद उनका हाथ सूजने के साथ काला पड़ने लगा था।

    14 को पारस अस्पताल

    इसके बाद उन्हें 14 मई की शाम पारस अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया और 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा। शिकायत पर सीएमओ डा. हरिदत्त नेमी से जांच कराई थी। शुक्रवार को रिपोर्ट आई, लेकिन रिपोर्ट से असंतुष्ट पीड़ित जवान के साथ आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद 50 जवानों के साथ शनिवार को पुलिस कार्यालय पहुंच गए थे।

    दोबारा जांच के टीम तय

    इसके बाद पुलिस आयुक्त ने दोबारा जांच की बात कही। दोबारा जांच के लिए डाक्टरों की टीम में डा. रमित रस्तोगी, डा. पीयूष मिश्रा, डा. नीतेश, डा. मिनी अवस्थी, डा. प्रवण कुमार, डा. सुमित मिश्रा थे। टीम की निगरानी के लिए अपर पुलिस आयुक्त डा. विपिन ताडा और प्रशिक्षु आइपीएस डा. सुमेध मिलिंद जाधव थे। पुलिस आयुक्त सीएमओ की दूसरी रिपोर्ट में कृष्णा और पारस अस्पताल के सीसी कैमरों की फुटेज-वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, डाक्टरों व स्टाफ के बयान आदि शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में जानें क्या है

    रिपोर्ट के अनुसार, आईटीबीपी के जवान की मां निर्मला देवी को सांस की समस्या के साथ हृदय रोग भी था। उनका सबसे पहले इलाज आईटीबीपी के अस्पताल में हुआ था। इसके बाद 13 मई की शाम 6:17 बजे कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया था। उस समय उनका हृदय 25 प्रतिशत ही काम कर रहा था। 14 मई को उनके हाथ मे सूजन और काला पड़ने लगा था। इसके बाद 14 की शाम 6:15 बजे तीमारदार उन्हें वहां से पारस अस्पताल के लिए निकले थे। 8:41 बजे पारस अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया, लेकिन इसबीच दोनों अस्पतालों में किसी भी सर्जन ने जवान की मां को नहीं देखा।

    तो बच जाता हाथ

    पारस अस्पताल में 15 मई की शाम लगभग पांच बजे सर्जन ने देखा था। हृदय रोग होने से मरीज की नसों में थक्का जमने से खून का प्रेशर कम हो गया था। इससे समस्या ज्यादा बढ़ी और संक्रमण फैलने पर हाथ काटना पड़ा। अगर तीन से छह घंटे के भीतर हाथ मे चीरा लगा दिया जाता तो हाथ काटने की संभावना न होती।

    दोनों अस्पतालों के डाक्टर पर रेल बाजार में मुकदमा

    दूसरी जांच रिपोर्ट में दोनों अस्पतालों में मरीज के इलाज में देरी करने से हाथ काटने की वजह बताई गई। इस पर पीड़ित विकास सिंह की तहरीर पर रेलबाजार थाने में दोनों अस्पताल के डाक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके बाद रेलबाजार पुलिस पारस पारस में भर्ती निर्मला देवी के बयान दर्ज करने पहुंची।

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