कानपुर में तैयार होंगे फाइटर और कमर्शियल पायलट, फ्रांस के सहयोग से 50 एकड़ में बनेगा वर्ल्ड क्लास पायलट ट्रेनिंग सेंटर
कानपुर में पायलट प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए 50 एकड़ जमीन को मंजूरी मिल गई है। यह केंद्र फ्रांस के सहयोग से वाणिज्यिक पायलटों और एयरोनॉटिक्स ...और पढ़ें

HighLights
सेंटर के लिए केडीए बोर्ड ने भू-उपयोग परिवर्तन को दी मंजूरी, शासन को भेजा प्रस्ताव
फ्रांस के सहयोग से तैयार सेंटर में दी जाएगी फाइटर जेट और कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग
रितेश द्विवेदी, कानपुर। कानपुर में पायलट ट्रेनिंग सेंटर स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए 50 एकड़ जमीन का रास्ता साफ हो चुका है। फ्रांस के सहयोग से बनने वाला यह अत्याधुनिक केंद्र कमर्शियल उड़ानों के पायलट तैयार करेगा। एयरोनाटिक्स, रक्षा व एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद केडीए की बोर्ड बैठक में ग्रीन बेल्ट की श्रेणी को हटाकर भू-उपयोग परिवर्तन का प्रस्ताव पास हो चुका है। स्वीकृति के लिए प्रस्ताव उड्डयन मंत्रालय व शासन के पास भेजा गया है।
आवंटन प्रक्रिया पूरी
चकेरी एयरपोर्ट क्षेत्र के विस्तार के साथ पायलट ट्रेनिंग सेंटर के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसी कड़ी में भारत-फ्रांस साझेदारी के तहत नेशनल स्किल ट्रेनिंग सेंटर (एनएसटीआइ) भी स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एंप्लायबिलिटी ट्रांसफार्मेशन (पीएम सेतु) योजना के तहत विकसित होगा। इसकी घोषणा इसी वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुए संयुक्त सहयोग कार्यक्रम के दौरान की गई थी। इसके तहत इंडिया-फ्रांस ईयर आफ इनोवेशन की शुरुआत भी हुई।
यहां प्रशिक्षण ले रहे
वहीं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) फुरसतगंज (रायबरेली) एयरफील्ड में स्थित एक पायलट प्रशिक्षण संस्थान भी है। यहां छात्रों को पायलट के साथ वायुयान अनुरक्षण अभियंता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। अकादमी में संचालित पायलट प्रशिक्षण में इस समय 250 युवक-युवतियां विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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फ्रांस की कंपनी ने आइआइटी व एचएएल से किया अनुबंध
फाइटर जेट राफेल बनाने बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दासौं ने दो वर्ष पहले ही आइआइटी व हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के साथ एमओयू किया था। इसमें पायलटों के उच्चस्तरीय प्रशिक्षण में सहयोग का भी अनुबंध है। यहां मुख्य फोकस सिम्युलेटर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा। दासौं की विशेषज्ञता से विमानन प्रणालियों व रखरखाव प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सिखाया जाएगा। सिम्युलेटर के माध्यम से मिलने वाले प्रशिक्षण से वास्तविक परिस्थितियों का पायलट अभ्यास कर सकेंगे, जिससे उनकी दक्षता व निर्णय क्षमता में वृद्धि होगी।
पायलट ट्रेनिंग सेंटर के लिए 50 एकड़ भूमि एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए एयरपोर्ट के आसपास स्थित ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग बदला गया है। मुख्यमंत्री ने चर्चा के बाद जमीन आवंटन को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की थी, जिसके बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
-के. विजयेन्द्र पांडियन, मंडलायुक्त
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