‘Mark Zuckerberg’ बनकर नाइजीरियन ठग ने किया कॉल, भरोसा जीत 1.57 करोड़ ठगे… कानपुर की रिटायर टीचर के साथ हैरान करने वाली ठगी
कानपुर में एक सेवानिवृत्त शिक्षिका एलिसन वीम्स से 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है। ठगों ने खुद को मार्क जुकरबर्ग और उनके सहयोगी बताकर फेसबुक और व ...और पढ़ें

ये फोटो एआई से बनाई गई है।
जागरण संवाददाता, कानपुर। खुद को मार्क जुकरबर्ग और उनके सहयोगी बताकर सेवानिवृत्त शिक्षिका से 1.57 करोड़ की ठगी करने वाला गिरोह नाइजीरिया का होने की आशंका साइबर टीम जता रही है। इसकी वजह यह है कि पीड़िता की ठगों से कई बार वीडियो काल के जरिए भी बातचीत हुई, जिसमें खुद को मार्क जुकरबर्ग बताने वाला व्यक्ति काफी सांवला दिखा था, लेकिन पीड़िता फिर भी उसे पहचान नहीं पाई।
सांवला रंग होने के चलते साइबर टीम ठग को नाइजीरिया का गिरोह होने का अनुमान लगा रही है। पीड़िता ने ठगों के बताए यूपीआइ के नंबर पर 20 जनवरी 2025 से 20 फरवरी 2026 के बीच अपनी एसबीआइ से 33 बार में 37,24,366 रुपये, बैंक आफ इंडिया से 20 बार में 14,42,264 रुपये, पीएनबी से 31 बार में 74,90,000 रुपये, इंडियन बैंक से तीन बार में 40000 रुपये और बैंक आफ बड़ौदा से तीन बार में 30,42000 रुपये ट्रांसफर किए थे। साइबर टीम अब उन यूपीआइ आइडी के जरिए उन खातों की जानकारी जुटा रही है।
चकेरी के आनंद नगर जगईपुरवा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका एलिसन वीम्स ने 16 मार्च 2026 को अज्ञात के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में धोखाधड़ी और आइटी एक्ट में मुकदमा कराया। उनके अनुसार, जनवरी 2025 में फेसबुक पर मार्क जुकरबर्ग नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। उसने कहा वह स्कूल खोलने का कारोबार करना चाहता है। इसके बाद मार्क जुकरबर्ग के सहयोगी बन खुद काे अमेरिका का गायक जाश टर्नर ने वाट्सएप पर काल करना शुरू कर दिया।
इस तरह बुना पूरा जाल
उन्होंने भी शहर में स्कूल खोलने और उसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हें देने आदि का झांसा दिया। इसके बाद कभी प्रोसेसिंग फीस तो कभी टैक्स समेत कारण बताकर लगभग 13 माह तक अपने जाल में फंसाकर विभिन्न मोबाइल नंबरों के यूपीआइ खातों में रुपये जमा करवा लिए। फिर फेसबुक अकाउंट भी डिलीट कर दिया गया। इसके बाद खुद को मार्क जुकरबर्ग का साथी बताने वाले मिरेकल गिवर्स ने रुपये वापस दिलाने का आश्वासन दिया लेकिन उसने भी शिपिंग चार्ज, कस्टम चार्ज समेत शुल्क के नाम पर रुपये जमा करा लिए। इस तरह से पीड़िता से कुल 1,57,38,630 रुपये की ठगी की गई।
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कई माह से चल रही थी बातचीत
साइबर क्राइम थाना प्रभारी सतीश चंद्र यादव ने बताया कि पीड़िता की रुपये ट्रांसफर करने से कई माह पहले से ठगों से बातचीत हो रही थी। वीडियो काल भी होती थी। उन्होंने बताया कि बात करने वाला काफी सांवला था। ऐसे में नाइजीरिया का गिरोह होने की आशंका है। जिन यूपीआइ आइडी पर रुपये भेजे गए हैं। उनके खातों की जानकारी मांगी गई है। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि रुपये किन-किन जिलों के खातों में पहुंचे हैं।
साइबर अधिकारी तो किसी ने अधिवक्ता बन की बात..ट्रेडिंग खाते में दिखाए गए 2,23,15,520 रुपये
पीड़िता ने साइबर टीम को बताया कि इसीबीच उनके मैसेंजर पर ''साइबर रिपोर्टिंग असिस्टेंस आनलाइन स्क्रैम रिपोर्टिंग सेंगर इंडिया'' नाम के अकाउंट से मैसेज आया, फिर दिल्ली के कथित अधिवक्ता अशोक सुरेश से संपर्क कराया गया। उसने बताया कि उनकी रकम विजडम कैपिटल कंपनी में निवेश कर दी गई है। उनके नाम से ट्रेडिंग खाते में 2,23,15,520 रुपये होना भी दिखाया गया। इसके बाद साइबर पुलिस अधिकारी संदीप बताने वाले व्यक्ति ने भी उन्हें काल की और आश्वासन दिया कि रुपये वापस मिलेंगे, पर काफी प्रयास के बाद भी रुपये नहीं मिले।
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