अंधविश्वास में आज भी जी रहे कुछ लोग : सर्पदंश से श्रमिक की मौत, झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र से जिंदा करने की नाकाम कोशिश
कौशांबी में सर्पदंश से एक व्यक्ति की मौत के बाद, परिजनों ने डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बावजूद उसे तंत्र-मंत्र से जीवित करने का प्रयास किया। ...और पढ़ें

कौशांबी में सर्पदंश से श्रमिक की मौत के बाद गमगीन लोग। जागरण
HighLights
चिकित्सकों ने मृत घोषित किया, गांव लाकर भी कराया गया तंत्र-मंत्र
कौशांबी जनपद में संदीपनघाट थाना क्षेत्र के गौसपुर गांव की घटना
संसू, जागरण, चायल (कौशांबी)। दुनिया चांद-सितारों तक पहुंच गई है लेकिन अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी मिथक अंधविश्वास से नहीं टूट रही है। इसका नमूना कौशांबी जनपद में दिखा। संदीपनघाट क्षेत्र के गौसपुर गांव में सर्पदंश के शिकार अधेड़ को चिकित्सकों द्वारा मृत बताने के बावजूद झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के जरिए उसे जीवित करने की कोशिश की गई। घंटों प्रयास के बाद तांत्रिकों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोगों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
शिव मंदिर के चबूतरे पर सोते समय सांप ने डसा
गौसपुर निवासी 50 वर्षीय राम नरेश पुत्र दुखीलाल मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी पत्नी ननकी देवी ने बताया कि 17 जुलाई की रात में भोजन करने के बाद वह गांव के शिव मंदिर में सोने चला गया था। रात करीब 12 बजे मंदिर के चबूतरे पर सोते समय सर्प ने डस लिया। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे परिवार के लोग गांव में झाड़-फूंक करने वालों के पास ले गए।
हालत बिगड़ी तो ले गए अस्पताल
हालत लगातार बिगड़ती देख भोर में जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद राम नरेश को मृत घोषित कर दिया। इसके बावजूद घरवालों को उसकी मौत पर विश्वास नहीं हुआ। वह शव को वापस गांव ले आए और तंत्र-मंत्र व झाड़-फूंक के जरिए दोबारा जीवित करने का प्रयास कराया। काफी देर तक चले अनुष्ठान के बाद तांत्रिकों ने भी राम नरेश को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार में मातम छा गया। उसकी पत्नी ननकी देवी, पुत्र रामबली, अभिषेक, गुल्लू तथा पुत्री रीता का को रो-रोकर हाल-बेहाल है।
...काश पहले ले जाते अस्पताल तो बच जाती जान
इस संबंध में संदीपनघाट के थाना प्रभारी आशुतोष सिंह ने बताया कि स्वजन ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया तो पंचनामा भरने के बाद शव उन्हें दे दिया गया। घटना के बाद गांव में शोक के साथ-साथ अंधविश्वास को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। ग्रामीणों को मलाल इस बात का था कि काश, अगर राम नरेश को समय से अस्पताल पहुंचा दिया गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।