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    Ganga Expressway पर कार-बस का कितना लगेगा टोल? 10 प्वाइंट में समझिए इसकी खासियत

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 06:51 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में गंगा एक्सप्रेस-वे के पहले चरण का लोकार्पण करेंगे, जिसके बाद यातायात शुरू हो जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे पर अनुमानित टोल ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. पीएम मोदी हरदोई में गंगा एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण करेंगे।

    2. मेरठ से प्रयागराज तक कार का अनुमानित टोल ₹1515 होगा।

    3. MLFF तकनीक से टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Ganga Expressway Toll Plaza: पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का कल हरदोई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण कर जनता को समर्पित करेंगे। लोकार्पण के साथ ही यातायात संचालन शुरू हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे किनारे औद्योगिक कॉरिडोर से रोजगार सृजन होगा।

    गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा के लिए टोल टैक्स की अधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन मेरठ से प्रयागराज तक सफर के लिए कार के लिए 1515 रुपये अनुमानित टोल टैक्स होगा, जबकि बस और ट्रकों के लिए यह राशि 2405 रुपये हो सकती है। मेरठ से बदायूं तक प्रथम पैकेज के 130 किमी के लिए कार के लिए 435 तथा ट्रक बस के लिए 1375 रुपये टोल टैक्स अनुमानित है।

    टोल टैक्स की अनुमानित दरें
    टोल प्लाजा और रैंप प्लाजा का नाम टोल (कार) - ₹ टोल (बस और ट्रक) - ₹
    खड़खड़ी प्रवेश स्थल प्रवेश स्थल
    सिंभावली 90 285
    स्याना 205 635
    हसनपुर 255 795
    संभल 345 1090
    चंदौसी 400 1260
    बदायूं 435 1375
    प्रयागराज 1515 2405

    कुल चार पैकेज में विभाजित

    गंगा एक्सप्रेसवे कुल चार पैकेज में विभाजित है। पहला पैकेज मेरठ से बदायूं तक 130 किमी लंबा है। जिसका निर्माण और संचालन मैसर्स आइआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। जबकि इससे आगे के तीन पैकेज अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पास है।

    टोल प्लाजा और अत्याधुनिक तकनीक (MLFF)

    मेरठ से बदायूं के बीच तैयार किए गए 130 किलोमीटर लंबे प्रथम चरण (पैकेज-1) में कुल सात टोल और रैंप प्लाजा स्थापित किए गए हैं। इन स्थानों से वाहन एक्सप्रेसवे पर आसानी से चढ़ और उतर सकेंगे। यदि मेरठ से प्रयागराज तक की कुल दूरी की बात करें, तो पूरे मार्ग पर 12 टोल प्लाजा बनाए गए हैं।

    इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ इस्तेमाल होने वाली MLFF (मल्टी लेन फ्री फ्लो) तकनीक है। इस स्मार्ट सिस्टम के कारण एक्सप्रेसवे पर प्रवेश के समय गाड़ियों को रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी; सेंसर वाहन के चलते समय ही उसे स्कैन कर एंट्री दर्ज कर लेंगे। हालांकि, वर्तमान में एग्जिट (निकास) पॉइंट पर टोल भुगतान के लिए बूथ से गुजरना होगा, जिसे आने वाले समय में पूरी तरह 'फ्री फ्लो' करने की योजना है।

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    दूरी के अनुसार टोल और प्रमुख नियम

    आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह के अनुसार, यद्यपि सरकार ने अभी टोल की आधिकारिक दरों की अंतिम सूची जारी नहीं की है, लेकिन प्रति किलोमीटर के हिसाब से औसत दरें पहले से तय हैं। इस मार्ग की सबसे बड़ी सहूलियत यह है कि यात्रियों को केवल तय की गई वास्तविक दूरी का ही टोल देना होगा।

    • दोपहिया वाहन वर्जित: गंगा एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
    • भारी जुर्माना: नियमों का उल्लंघन कर एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करने वाले दोपहिया वाहनों पर सख्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

    गंगा एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं

    1. सफर के समय में कमी: मेरठ से प्रयागराज के बीच लगने वाला समय 12-14 घंटे से घटकर मात्र 6-7 घंटे रह गया है।
    2. हवाई पट्टी (Airstrip): शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी बनाई गई है, जिसका उपयोग आपात स्थिति में वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए किया जा सकेगा।
    3. 12 जिलों से कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों (मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज) को कनेक्ट करेगा। साथ ही इन जिलों को सीधा फायदा पहुंचाएगा
    4. MLFF तकनीक: इसमें 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' टोलिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे प्रवेश करते समय वाहनों को टोल पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
    5. पर्यावरण अनुकूल: इसके किनारे हजारों की संख्या में पेड़ लगाए गए हैं और जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाया गया है।
    6. प्रमुख संरचनाएं: एक्सप्रेसवे पर गंगा नदी और रामगंगा नदी पर विशाल पुल बनाए गए हैं। इसमें कुल 17 इंटरचेंज, 28 फ्लाईओवर और 900 से अधिक पुलिया (culverts) शामिल हैं।
    7. औद्योगिक गलियारा: इसके किनारे औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे बदायूं, संभल और हरदोई जैसे जिलों में कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बड़ा बाजार मिलेगा।
    8. कृषि उत्पादों को निर्यात तेज होगा: प्रयागराज, प्रतापगढ़ व कौशांबी के कृषि उत्पादों को कम समय में आसानी से दिल्ली-एनसीआर व पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों तक भेजा जा सकेगा। यही नहीं विदेश निर्यात भी बढ़ेगा। इससे यहां के किसानों की तकदीर बदलेगी तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
    9. अमरूद व आलू किसानों को अच्छा लाभ: इस एक्सप्रेस-वे से प्रयागराज के अमरूद और आलू किसानों को अच्छा-खासा लाभ होगा। प्रयागराज और कौशांबी में अमरूद की अच्छी उपज होती है। लगभग डेढ़ हजार किसानों के पास 2200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद के बाग हैं। इनमें 12 हजार से ज्यादा श्रमिक लगे हैं। संगम नगरी के सेबिया अमरूद की मांग यूरोपीय देशों तक में है।
    10. गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्ट्रैटेजिक कनेक्टिविटी है। यह एक्सप्रेसवे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इससे उत्तर प्रदेश को देश के बड़े बाजारों, बंदरगाहों और एयर कार्गो नेटवर्क से सीधा फायदा मिलेगा। लाजिस्टिक्स लागत घटेगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

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